रायगढ़ 24 मई (आरएनएस) सड़क हादसा हो, हार्ट अटैक हो या अचानक सांसें थम जाएं, अब रायगढ़ पुलिस सिर्फ कानून नहीं संभालेगी बल्कि मौके पर जिंदगी बचाने की पहली उम्मीद भी बनेगी, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में आयोजित विशेष सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 100 पुलिसकर्मियों को ऐसी जीवनरक्षक तकनीक सिखाई गई जिससे आपात स्थिति में किसी भी व्यक्ति की धड़कन दोबारा चालू करने तक की कोशिश की जा सके। स्वर्गीय श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के तत्वावधान में ऑल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रायगढ़ द्वारा आयोजित इस एकदिवसीय प्रशिक्षण में डॉक्टरों की टीम ने पुलिस जवानों को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर देने की पूरी प्रक्रिया प्रायोगिक तरीके से समझाई। कार्यक्रम में डॉ. गजेंद्र ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और वीडियो डेमो के जरिए बताया कि दुर्घटना, आगजनी, बाढ़ या किसी भी आपदा के दौरान यदि किसी व्यक्ति का ब्लड सर्कुलेशन रुक जाए, वह बेहोश हो जाए और प्रतिक्रिया देना बंद कर दे तो सही तरीके से दिया गया सीपीआर उसकी जान बचा सकता है। पुलिसकर्मियों को सिखाया गया कि सबसे पहले पीड़ित को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं, उसकी प्रतिक्रिया जांचें और तुरंत 108 व 112 पर कॉल करें। मेडिकल सहायता पहुंचने तक लगातार सीपीआर देकर जीवन बचाने का प्रयास किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान डमी मॉडल और दुर्घटना संबंधी वीडियो के माध्यम से लाइव डेमो कराया गया, जिसके बाद जवानों ने खुद सीपीआर का अभ्यास किया। डीएसपी सुशांतो बनर्जी ने आयोजन के लिए डॉक्टर प्रभात पटेल और उनकी टीम का आभार जताया। कार्यक्रम में आरआई अमित सिंह सहित जिलेभर के पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बहरहाल, यह प्रशिक्षण सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आपदा की घड़ी में पुलिस को “रक्षक” से आगे बढ़ाकर “जीवनदाता” बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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