अयोध्या 26 मई (आरएनएस)। हनुमानगढ़ी मंदिर से दशरथ महल चौराहे तक व कनक भवन जाने वाले मार्ग की दोनों पटरियों पर बाहर से आने वाले अस्थाई दुकानदारों व ठेला वालों ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिससे श्रद्धालुओं व आम नागरिकों को उस मार्ग पर चलना दूभर हो रहा है। इन अस्थाई दुकानदारों में ज्यादातर दुकानदार व ठेला लगाने वाले बाहरी जनपदों के हैं जो पैसा कमाने के लिए उचित- अनुचित कुछ भी नहीं देखते हैं तथा इस कब्जे का विरोध करने वालों को स्थानीय पुलिस कर्मियों से मिलकर प्रताडि़त कराते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रद्धालुओं के पानी पीने हेतु जो उपकरण नगर निगम अयोध्या ने लगा रखें हैं उसको भी इन अस्थाई दुकानदारों ने चारों तरफ से घेर रखा है। हनुमानगढ़ी के पास तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा इस अतिक्रमण को हटवाने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही डरवाने धमकाने का काम किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ताओं को बार थाने पर बुलाकर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है। एक शिकायत कर्ता ने तो एस एस पी/,डी आई जी व जिलाधिकारी अयोध्या को लिखित प्रार्थना-पत्र देकर इस अतिक्रमण हटवाने का अनुरोध किया है जिलाधिकारी के यहां से जांच किए जाने का आदेश निर्गत होने से चिढ़े पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता से शिकायत वापस वापस न लेने पर उसे किसी भी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी भी दे रहे है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को हनुमानगढ़ी मंदिर से अमावां मन्दिर के मुख्यद्वार व दशरथ महल से कनक भवन जाने वाले मार्ग पर सुबह चार बजे से रात दस बजे तक कायम रहने वाले जबर्दस्त अतिक्रमण को हटवाने व ई-रिक्शों का आवागमन इस क्षेत्र में पूरी तरह से बन्द कराने हेतु सख्त कदम उठाने चाहिए क्योंकि इन मार्गों पर होने वाला अतिक्रमण व ई- रिक्शों का आवागमन पुलिस कर्मियों की सांठ-गांठ से ही हो रहा है जिससे श्रद्धालुओं के साथ साथ स्थानीय दुकानदार व नागरिक सभी परेशान होते हैं। तमाम घटनाएं भी आये दिन घटती रहती हैं। रामकोट क्षेत्र में प्रवेश मार्गों पर जब पुलिस बैरियर्स लगें हैं और पुलिस कर्मी तैनात हैं तो फिर ई-रिक्शा प्रतिबंधित क्षेत्र में कैसे आते जाते हैं? शिकायतकर्ताओं को डराना- धमकाना भी रोका जाना चाहिए अन्यथा कोई सही जनहित की आवाज क्यों उठायेगा?
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