वॉशिंगटन 3 जून। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति और ईरान-इजरायल तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि इजरायल की सुरक्षा और अस्तित्व को बनाए रखने में उनकी भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि वे हस्तक्षेप नहीं करते तो आज इजरायल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता था।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है।
अयातुल्ला से मुलाकात के संकेत
ईरान के मुद्दे पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि भविष्य में उनकी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला से मुलाकात हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले ही परमाणु हथियार विकसित न करने की दिशा में सहमति जता चुका है, हालांकि हालात बदल भी सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में कमजोर हुई है और क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।
ईरान के साथ संघर्ष को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमेशा अपने सहयोगी इजरायल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में उठाए गए कदमों ने क्षेत्रीय हालात को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इजरायल को मजबूत समर्थन मिला।
घरेलू राजनीति पर बात करते हुए ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की खुलकर सराहना की। उन्होंने दोनों नेताओं को बेहद प्रतिभाशाली बताते हुए कहा कि वे अमेरिकी राजनीति में मजबूत नेतृत्व की क्षमता रखते हैं।
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