चौथे दिन सुनाया भगवान वामन अवतार व श्री कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग
सिरसा 4 जून (आरएनएस)। समस्त स्वर्णकार समाज की ओर से 31 मई से 6 जून तक आयोजित की जा रही संगीतमयी श्रीमद्भावगत कथा के चौथे दिन कथावाचिका डा. राधिका दीदी ने भगवान वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का प्रसंग सुनाया। चौथे दिन कथा के दौरान बतौर मुख्य अतिथि राजकुमार शर्मा व मोहित शर्मा तथा विशिष्ठ अतिथि के रूप में एमसी संजीव रातूसरिया, सुशील सैनी (प्रतिनिधि), एमसी दीपक बंसल, एमसी राजिंदर कुमार, मुकेश रोहिला (प्रतिनिधि), एमसी मनीष कुमार भगवान वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचिका ने बताया कि भागवताचार्यों के अनुसार, प्रहलाद के पौत्र दानवराज राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी। देवताओं की रक्षा और इंद्र का राज्य वापस दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया था। वामन देव ने राजा बलि से दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। भगवान ने विराट रूप धारण कर पहले पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग (सृष्टि) को नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कुछ नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर झुकाकर अपना तन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि वामन अवतार हमें सिखाता है कि जो भक्त अपना सब कुछ (तन, मन, धन) भगवान को अर्पित कर देता है, भगवान स्वयं उसके अधीन हो जाते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। इसके बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथा वाचिका ने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा, तब कंस के कारागार में माता देवकी और वासुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए और फिर बाल रूप धारण किया। नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान जीवंत झांकियां सजाई गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान के बाल स्वरूप पर फूलों की वर्षा की, सोहर गाए और सुमधुर भजनों पर जमकर नृत्य किया। डा. राधिका ने बताया कि भगवान के माटी खाने के प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि परमात्मा की प्राप्ति केवल सच्चे प्रेम और समर्पण से ही संभव है। सभी को माक्खन मिश्री का प्रसाद वितरित करने के साथ ही कथा को विश्राम दिया गया। संजय सोनी ने बताया कि कथा 31 मई से 6 जून तक चलेगी। कथा का समय सांय 03.15 बजे से सांय 6.15 बजे तक रहेगा। 07 जून को पूर्ण आहूति व भंडारा होगा। उन्होंने समस्त शहरवासियों से आह्वान किया कि समयानुसार कार्यक्रम में आकर कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बनें। इस मौके पर सोनी धर्मशाला के प्रधान सोनू गोरीवाला, तहसील प्रधान गजानंद सोनी सिरसा, लीलाधर सोनी, संजय सोनी, महेंद्र सोनी, राजकुमार सोनी, कृष्ण सोनी, सुरजीत सोनी, बंसीलाल सोनी, सतपाल सोनी, प्रमोद सोनी, रामप्रताप सोनी, मदन सोनी, विकास सोनी, बलवंत सोनी, राजू सोनी, रामकिशन सोनी, मनोज सोनी, काशीराम सोनी, सुखविंद्र सोनी सहित स्वर्णकार समाज के अनेक महानुभाव उपस्थित थे।
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