सुल्तानपुर 4 जून (आरएनएस )। राजकीय मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर की ओपीडी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मरीजों एवं विभागीय सूत्रों के अनुसार मेडिकल कॉलेज परिसर में कुछ बाहरी व्यक्तियों की सक्रियता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि मिश्रा, राय एवं सिंह उपनाम से पहचाने जाने वाले कुछ व्यक्तियों की गतिविधियां लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि इन व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों के अनुसार उक्त व्यक्तियों की कथित सक्रियता मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के आसपास देखे जाने की चर्चा है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ बाहरी लोग मरीजों को प्रभावित करने तथा चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं के संबंध में अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करने का प्रयास करते हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच अथवा आधिकारिक अभिलेख से नहीं हुई है। विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि मेडिकल कॉलेज परिसर एवं उसके आसपास संचालित कुछ मेडिकल स्टोर्स पर मरीजों की बढ़ती भीड़ को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान में बाहरी व्यक्तियों द्वारा दवा लेखन प्रक्रिया अथवा मरीजों के उपचार संबंधी निर्णयों को प्रभावित करने जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में समय-समय पर प्रभावी निगरानी और जांच आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार पूर्व में मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा अनधिकृत हस्तक्षेप पर नियंत्रण के प्रयास भी किए गए थे, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की चर्चा रही। बावजूद इसके, एक बार फिर कुछ नामों को लेकर उठ रही चर्चाओं ने आमजन के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज प्रशासन तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि मेडिकल कॉलेज परिसर में कथित बाहरी हस्तक्षेप, दवा लेखन व्यवस्था एवं संभावित दलाली तंत्र से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। फिलहाल मामला चर्चाओं और आरोप-प्रत्यारोपों तक सीमित है तथा किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों एवं चर्चाओं का संज्ञान लेकर क्या कदम उठाते हैं।
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