लखनऊ 4 जून (आरएनएस ):उत्तर प्रदेश शासन ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के अंतरजनपदीय स्थानांतरण को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा अनुभाग-5, पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा महानिदेशक, स्कूल शिक्षा को औपचारिक निर्देश जारी किए गए हैं।शासन के निर्देश में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्तमान जनगणना कार्य (2026-27) में बड़ी संख्या में बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक-कर्मचारी तैनात हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर स्थानांतरण किए जाने से जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है। इसी को देखते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को अत्यंत सीमित और नियंत्रित रखने का निर्णय लिया गया है।निर्देशों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे, जबकि केवल विशेष एवं मानवीय आधार वाली परिस्थितियों में ही स्थानांतरण की अनुमति दी जाएगी। इसमें गंभीर बीमारियों, दिव्यांगता एवं पारिवारिक चिकित्सा स्थितियों को प्राथमिकता दी गई है।नई व्यवस्था के तहत यदि शिक्षक या शिक्षिका स्वयं, उनके पति/पत्नी अथवा अविवाहित पुत्र-पुत्री दिव्यांग हैं, तो ऐसे मामलों में स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। इसी प्रकार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त होने की स्थिति में भी स्थानांतरण की अनुमति दी जा सकेगी। इसके अलावा यदि किसी शिक्षक या शिक्षिका अथवा उनके अविवाहित पुत्र-पुत्री को डायलिसिस की आवश्यकता है, तो ऐसे मामलों को भी मानवीय आधार पर शामिल किया गया है।शासन ने यह भी प्रावधान किया है कि यदि पति और पत्नी दोनों परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, तो छात्र-शिक्षक अनुपात की दृष्टि से न्यूनतम भार वाले जनपद में दोनों में से किसी एक का स्थानांतरण किया जा सकेगा। इससे पारिवारिक संतुलन और शैक्षिक व्यवस्था दोनों को संतुलित रखने का प्रयास किया जाएगा।इसके अतिरिक्त अन्य किसी विषम परिस्थिति में स्थानांतरण केवल मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद ही किया जा सकेगा। यह व्यवस्था पूरी तरह अपवाद स्वरूप होगी और इसका उद्देश्य अत्यंत आवश्यक मामलों में ही निर्णय लेना सुनिश्चित करना है।शासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान निर्णय का उद्देश्य एक ओर जहां जनगणना कार्य को सुचारु रूप से संचालित रखना है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक रूप से जरूरतमंद शिक्षकों को मानवीय आधार पर राहत प्रदान करना भी है। इस नई नीति के लागू होने के बाद अंतरजनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और चयनात्मक रूप में संचालित होगी, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न न हो।
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