फर्जीवाड़ा कर लेखपालों, राजस्व कर्मियों, पूर्व प्रधानों सहित 60 लोगों के नाम हुई थी करोड़ों की भूमि
खतौनी पर फिर भगवान का नाम चढ़ाया गया
प्रयागराज। भूमाफिया और तहसील के कर्मचारियों तथा लेखपाल एवं पूर्व प्रधानों ने मिलीभगत कर भगवान श्रीआनंद बिहारी विराजमान राधाकृष्ण मंदिर के नाम की भूमि अपने नाम करा ली। वह एक-दो बीघा नहीं, पूरे 100 बीघा जमीन को हेराफेरी कर कागजातों में अपने नाम करा लिया।
फर्जीवाड़ा ऐसे कि जमीन का मालिकाना हक जिसके पक्ष में था, उसके निधन के बाद जालसाजी कर जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। प्रकरण मुख्यमंत्री के पास पहुंचा तो उच्चस्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सभी फर्जी बैनामे निरस्त कर दिए गए।
सोरांव के निगदिलपुर व बरई हरक गांव में स्थित भगवान श्रीआनंद बिहारी विराजमान राधाकृष्ण मंदिर के नाम की लगभग 100 बीघा जमीन की 60 लोगों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई थी। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से हुई तो तत्कालीन मुख्य सचिव ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। डीएम ने तत्कालीन सीआरओ तथा एसडीएम की जांच कमेटी गठित की थी।
उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीडीसी चकबंदी और एसओसी चकबंदी के आदेश पर सभी फर्जी रजिस्ट्री खारिज कर दी गई। फर्जी रजिस्ट्री खारिज करने के बाद फिर भगवान का नाम खतौनी पर चढ़ गया। ये फर्जी रजिस्ट्री लेखपालों, पूर्व प्रधानों तथा स्थानीय भूमाफिया के नाम पर हुई थी।
लगभग 55 करोड़ रुपये कीमत की इस जमीन को लेकर अब अमलदरामद में खेल कर दिया गया। जो नंबर चढऩा चाहिए था, उसके स्थान पर दूसरा नंबर चढ़ा दिया गया। यह गलती से हुआ अथवा किसी साजिश के तहत किया गया, इसकी जांच शुरू हो गई है। इसमें सोरांव के चकबंदी अधिकारी व सहायक चकबंदी अधिकारी के खिलाफ जांच की जा रही है।
जमीन की रजिस्ट्री निरस्त : बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी
इस बाबत बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री निरस्त करा दी गई है। चकबंदी अधिकारी सोरांव को नंबर दुरुस्त कराने के लिए निर्देशित किया गया है, जो जल्द ही ठीक हो जाएगा।
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