—- विधायक असीम राय बोले- सेवा, समर्पण और सादगी के प्रतीक थे डॉ. ब्रजेश चंद्र।
—- 24 वी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।
कुशीनगर, 06 जून (आरएनएस)। इंसान की पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए सेवा और सद्कार्यों से होती है। यही कारण है कि समाजसेवी चिकित्सक डॉ. ब्रजेश चंद्र श्रीवास्तव के निधन के 24 वर्ष बाद भी लोग उन्हें उसी सम्मान और आत्मीयता के साथ याद कर रहे हैं।उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में जन प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और क्षेत्रीय लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमकुहीराज के भाजपा विधायक डॉ. असीम कुमार राय ने कहा कि डॉ. ब्रजेश चंद्र श्रीवास्तव का पूरा जीवन सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल रहा। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक तभी लोगों के दिलों में जगह बना पाता है जब उसके भीतर सेवा का भाव हो। डॉ. श्रीवास्तव ने अपने जीवन में इसी भावना को सर्वोपरि रखा, जिसका परिणाम है कि आज उनके निधन के 24 वर्ष बाद भी लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि डॉ. ब्रजेश चंद्र श्रीवास्तव बेहद सरल, सौम्य और सुलझे हुए व्यक्तित्व के धनी थे। किसी भी जरूरतमंद की मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहते थे। समाज के प्रति उनका समर्पण और लोगों के प्रति आत्मीय व्यवहार ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। डुमरिया मठ के महंत एवं पूर्व प्रधान रूद्रानंद गिरी ने डॉ. श्रीवास्तव के साथ बिताए अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर लोगों के दुख-दर्द को अपना समझा और बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा की। उनके व्यक्तित्व की यही विशेषता उन्हें आज भी लोगों के दिलों में जीवित रखे हुए है।
इस अवसर पर भाजपा नेता उमेश चंद्र श्रीवास्तव (मुन्ना लाल), बृज बिहारी श्रीवास्तव, बिपिन बिहारी श्रीवास्तव, समाजसेवी विजय राय, पं. मित्र राकेश श्रीवास्तव, राजेश गौड़, अंजुम श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार अशोक तिवारी, राजेश यादव, संजुम श्रीवास्तव, अनूप, ऋषि श्रीवास्तव, यशराज, ओम, मयंक सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. ब्रजेश चंद्र श्रीवास्तव के छोटे पुत्र राकेश श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ता एवं पत्रकार संयोग श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, गणमान्य लोगों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता द्वारा दिखाए गए सेवा और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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