—- कसया में लेखपाल का जलवा शिकायत करने वालों को ही बना दिया मुल्जिम।
कुशीनगर, 06 जून (आरएनएस)। जनपद के कसया तहसील के लेखपाल राधेश्याम सिंह अपने कारगुजारियों को लेकर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। ग्राम सभा रहसु जनूबी पट्टी के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि लेखपाल की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाने और एसडीएम से शिकायत करने का खामियाजा उन्हें फर्जी मुकदमे के रूप में भुगतना पड़ रहा है ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से एक ही जगह जमे लेखपाल के खिलाफ शिकायत करना उन्हें महंगा पड़ गया। उनकी शिकायत की जांच होने से पहले ही लेखपाल ने शिकायतकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज करा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि चौरा खास थाने में 14 मई 2026 को दर्ज मुकदमा संख्या 89/26 पूरी तरह मनगढ़ंत, द्वेषपूर्ण और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लेखपाल राधेश्याम सिंह ने दबंगो के साथ मिलकर गरीब परिवारों को निशाना बनाया और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिये गये पत्र में कहा है कि लेखपाल राधेश्याम सिंह का स्थानांतरण 25 जून 2025 को हो चुका था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी वह अपने रसूख के दम पर कसया तहसील में ही जमे हुए हैं। इतना ही नहीं उनकी बेटी व दमाद भी लंबे समय से कसया तहसील क्षेत्र में तैनात है जो उनके ऊची पहुंच का एक उदाहरण है। ग्रामीणो का आरोप है कि लेखपाल की बेटी लेखपाल है किन्तु कभी भी क्षेत्र मे नही जाती है। इतना ही नही आईजीआरएस का रिपोर्ट खुद लेखपाल राधेश्याम सिंह लगाकर बेटी का हस्ताक्षर बनाते है। जिसकी निष्पक्ष जांच करा दी जाये तो दूध का दूध, पानी का पानी साफ हो जायेगा। इनसेट– जांच टीम से बाहर थे, फिर भी मौके पर क्यों पहुंचे?– शिकायत में यह भी कहा गया है कि 6 अप्रैल 2026 को एसडीएम कसया द्वारा गठित जांच टीम में राधेश्याम सिंह का नाम शामिल नहीं था। इसके बावजूद वह मौके पर पहुंचे और कथित कब्जाधारियों के साथ मिलकर जांच को प्रभावित करने का प्रयास करते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल राधेश्याम सिंह द्वारा विपक्षी के पक्ष मे हस्तक्षेप करने के कारण विरोध होने लगा जिसके वजह से जांच टीम बिना समुचित जांच किए लौट गई और बाद में अधूरी व संदिग्ध रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौप दी। ग्रामवासियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत करना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि शिकायतकर्ताओं पर ही मुकदमे लाद दिए जाएं यह कहा का न्याय है? आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?।
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