वाशिंगटन,06 जून। नासा ने आधिकारिक तौर पर विमानन के एक नए युग में प्रवेश कर लिया है। उसके प्रायोगिक एक्स -59 विमान ने पहली बार ध्वनि अवरोध को सफलतापूर्वक पार कर लिया, जो भविष्य में आकाश में यात्रा करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह ऐतिहासिक उड़ान अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के क्वेस्ट मिशन के लिए एक बड़ी छलांग है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक सुपरसोनिक उड़ान के कर्कश शोर को एक हल्की-सी गडग़ड़ाहट से बदलना है।
दशकों तक ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरना, जिसे सुपरसोनिक उड़ान के रूप में जाना जाता है, कान बहरा कर देने वाले ध्वनि विस्फोट का पर्याय था। जब कोई विमान ध्वनि तरंगों की गति से अधिक तेज गति से यात्रा करता है तो वह एक दबाव तरंग उत्पन्न करता है, जो जमीन से टकराकर बिजली की कड़कड़ाने जैसी आवाज पैदा करती है। इस शोर के कारण जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ान पर वैश्विक प्रतिबंध लगे हुए हैं।
एक्स -59 को इस स्थिति को बदलने के लिए डिजाइन किया गया है। तेज धमाके के बजाय यह विमान एक हल्की-सी थपकी जैसी आवाज पैदा करने का लक्ष्य रखता है, जो दूर से आती हुई कार के दरवाजे के बंद होने की आवाज से भी कम होती है। कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस में परीक्षण उड़ान के दौरान विमान ने मैक 1.1 की अधिकतम गति प्राप्त की। इसकी गति ध्वनि से 1.1 गुना अधिक करीब 1,147 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
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