जौनपुर(आरएनएस )। जिले के रामपुर थाना क्षेत्र के भिऊरा गांव में एक विवाहिता को सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि उसका मायका दहेज के ‘दानवोंÓ की 5 लाख रुपये की डिमांड पूरी नहीं कर सका। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी पति दिनेश पटेल को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 55,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसकी आधी राशि बिलखती मां को दी जाएगी।मडिय़ाहूं के बारी गांव की रहने वाली बदहवास मां कमलावती ने अपनी बेटी रेनू की डोली 21 नवंबर 2017 को दिनेश पटेल के घर बड़े अरमानों के साथ भेजी थी। मां ने अपनी हैसियत से बढ़कर दान-दहेज दिया, लेकिन उसे क्या पता था कि वह अपनी लाडली को ससुराल नहीं, बल्कि सीधे मौत के कुएं में धकेल रही है। शादी के कुछ दिन बीतते ही पति दिनेश और दोनों जेठानियों के सिर पर 5 लाख रुपये कैश का भूत सवार हो गया। रेनू को दिन-रात नरकीय यातनाएं दी जाने लगीं, उसे मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा गया। 4 मार्च 2020 की सुबह जब मायके वालों के फोन की घंटी बजी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गांव के एक शख्स ने कांपती आवाज में बतायाकृ “आपकी बेटी को ससुराल वालों ने जान से मार डाला है और उसकी लाश को कुएं में फेंक दिया है!”ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस आई थी और कुएं की गहराइयों से रेनू की लाश को बाहर निकालकर ले गई है। पुलिस ने इस मामले की गहन तफ्तीश कर कोर्ट में पुख्ता आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत के कटघरे में जब सरकारी वकील ने एक के बाद एक अचूक गवाहों को पेश किया, तो आरोपी पति के सारे बहाने धरे के धरे रह गए। कोर्ट ने पति दिनेश पटेल को इस जघन्य अपराध का मुख्य गुनहगार पाया ।
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