नकुल कुमार मंडल
हुगली 9 जून (आरएनएस)। बंगाल में ममता सरकार क्या बदली इस राज्य की जैसे सियासत ही बदल गई। राज्य में सत्ता बदलने के बाद से ही जिले में इस्तीफों का दौर चल रहा है। सबसे पहले चंदननगर नगर निगम के डिप्टी मेयर ने इस्तीफा दिया, उसके बाद मेयर और 30 पार्षदों ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद भद्रेश्वर नगर पालिका के चेयरमैन और कई पार्षदों ने इस्तीफा दिया और वाइस-चेयरमैन को गिरफ्तार कर लिया गया। अब बांसबेरिया नगर पालिका के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन ने भी एक साथ इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को बांसबेरिया नगर पालिका के चेयरमैन तापस मुखर्जी और वाइस-चेयरमैन शिल्पी चटर्जी ने चुंचुड़ा के सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद चेयरमैन तापस मुखर्जी ने कहा कि राज्य में सरकार बदल गई है, जिससे पूरे पश्चिम बंगाल में हालात बदल गए हैं। नगर पालिका के पास फंड की कमी है, जिससे नागरिक निकाय को चलाना मुश्किल हो रहा है; इसलिए उन्होंने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि नई सरकार का बजट 22 तारीख़ को पेश होने की संभावना है और उन्हें बताया गया है कि उससे पहले नगर पालिका को एक भी पैसा जारी नहीं किया जा सकता। ज़ाहिर है, नगर पालिका को चलाने या लोगों को सेवाएं देने के लिए पर्याप्त फ़ंड नहीं है, इसलिए पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है। इस पर टिप्पणी करते हुए सप्तग्राम के विधायक स्वराज घोष ने कहा कि कमजोर दलीलों को नहीं माना जा सकता, भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर है और वे हिसाब नहीं दे पा रहे हैं, इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। उस नगर पालिका को माफिया चलाते थे, भ्रष्टाचार हर जगह फैला हुआ है, जहां भी देखो, भ्रष्टाचार ही है। इलाके में अवैध निर्माण, तालाब भरना और गैर-कानूनी भर्ती से लेकर पोर्ट ट्रस्ट की सरकारी जमीन की प्लॉटिंग और बिक्री तक की गतिविधियां चल रही थीं। ‘पथश्रीÓ प्रोजेक्ट के लिए आवंटित 27 करोड़ या ‘प्रधानमंत्री आवास योजनाÓ के लिए 12 करोड़ का कोई हिसाब-किताब नहीं है। विधायक ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के कई अस्थायी कर्मचारी नगर पालिका के पेरोल पर थे, जबकि साथ ही वे बीटीपीएस और टोल प्लाजा में भी कर्मचारी के तौर पर लिस्टेड थे, असल में, वे स्थानीय माफिया बॉस के लिए काम करते हैं। पोर्ट ट्रस्ट की ज़मीन पर रेस्तरां जैसे कारोबार चल रहे हैं। स्वराज बाबू ने नगर पालिका के स्क्रैप की बिक्री के लिए टेंडर में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया। आरोप है कि पार्षद ने खुद एक तालाब को भरकर वहां फर्नीचर का शोरूम बनाया और चलाया। उस पार्षद ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया है। इस बात के सबूत हैं कि ‘आवास योजनाÓ (हाउसिंग स्कीम) के लिए आया पैसा कभी भी असल हकदारों तक नहीं पहुंचा; बल्कि, उस पैसे को अलग-अलग बैंक खातों के ज़रिए निकालकर उसका गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि नगरपालिका के पास सात लाख रुपये का फ़ंड था, लेकिन वह पैसा अब खत्म हो चुका है। चुनाव प्रचार और ऐशो-आराम में उड़ा दिया गया। जबकि पेंशन का भुगतान तीन महीने से रुका हुआ है। नगरपालिका पार्किंग एरिया, ‘टोटोÓ स्टैंड और ऑटो-रिक्शा स्टैंड से रेवेन्यू इक_ा करती थी, फिर भी जनता द्वारा दिया गया टैक्स का पैसा भी हड़प लिया गया। स्वराज बाबू ने साफ तौर पर कहा है कि इस ‘माफिया राजÓ को जारी नहीं रहने दिया जा सकता। माफिया जैसा यह राज़ सिफऱ् नगरपालिका में ही नहीं, बल्कि छोटोग्राम और मोगरा-2 ग्राम पंचायतों में भी चल रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार के कुछ मामलों की पहचान की है और नगरपालिका को नोटिस भी भेजे हैं, फिर भी फ़ंड का कोई सही हिसाब-किताब नहीं है; इसी वजह से हालात से निपटने के लिए इस्तीफा दिया गया।
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