—- वेतन रोका, संवाद छोड़ा, अब आंदोलन भड़का? पीडब्ल्यूडी में हंगामे के बीच घिरे अधिशासी अभियंता।
कुशीनगर, 09 जून (आरएनएस) जिस विभाग के कंधों पर सड़क, पुल और विकास कार्यों की जिम्मेदारी है, वहां इन दिनों विरोध की गूंज सुनाई दे रही है। बात कर रहे है लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड की। जहा कर्मचारियों और अभियंताओं का गुस्सा आखिरकार सोमवार को फूट पड़ा है। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने अधिशासी अभियंता कुशीनगर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आरोप इतने गंभीर है कि विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही हैं।
आंदोलनकारी अभियंताओं का आरोप है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय अधिशासी अभियंता राजेश निगम ने ऐसा रवैया अपना लिया है। जिससे पूरे कार्यालय में भय, असुरक्षा और तनाव का माहौल कायम हो गया है। हालात यहां तक पहुंच गए कि कर्मचारियों को अपने ही विभाग के खिलाफ धरना -प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा है। अभियन्ताओ का आरोप है कि आंदोलन की पूर्व सूचना और मुख्य अभियंता गोरखपुर क्षेत्र के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अधिशासी अभियंता राजेश निगम कर्मचारियों से बातचीत करने नहीं पहुंचे। संघ का दावा है कि जब कर्मचारी अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन शुरू कर रहे थे। उसी समय अधिशासी अभियंता बिना अनुमति मुख्यालय छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद कर्मचारियों का गुस्सा भड़क उठा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि अधिकारी संवाद से भागेंगे तो विवाद सुलझेगा कैसे?। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ का आरोप है कि निर्माण खंड के पांच अभियंताओं का मई माह का वेतन बिना किसी लिखित आदेश के रोक दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि दबाव बनाने की कोशिश है। सरकारी सेवा में वेतन केवल आय का साधन नहीं बल्कि कर्मचारियों का अधिकार माना जाता है। ऐसे में बिना स्पष्ट आदेश वेतन रोके जाने के कारण कर्मचारियों की नाराजगी आग मे घई डालने का कार्य कर दिया है।
इनसेट– कार्यालय में काम कम, खौफ ज्यादा?– संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि अधिशासी अभियंता द्वारा आए दिन किसी न किसी कर्मचारी को निशाना बनाया जाता है। कभी नोटिस, कभी दबाव और कभी प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी से कर्मचारियों का मनोबल तोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि कार्यालय का माहौल इतना तनावपूर्ण हो चुका है कि कर्मचारी खुलकर अपनी बात रखने से भी डरते हैं। यही वजह है कि अब व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि सामूहिक आंदोलन का रास्ता चुना गया है।
इनसेट– मुख्य अभियंता का आदेश भी बेअसर?– मुख्य अभियंता द्वारा कर्मचारियों से वार्ता कर समस्याओं का समाधान करने का निर्देश अधिशासी अभियंता राजेश निगम को दिया गया था। इसके बावजूद यदि बातचीत नहीं हुई और आंदोलन शुरू हो गया, तो सवाल अधिशासी अभियंता की मनबढई व कार्यशैली पर उठना स्वभाविक है। विभागीय गलियारों मे इस बात की चर्चा जोरो पर है कि अधिशासी अभियंता राजेश निगम को कौन- सा प्रशासनिक व राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। जिसके भरोसे वह अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों को ठेगा दिखने से खौफ नही खाते।
इनसेट– लडाई आर-पार के मूड में– संघ भवन में हुई बैठक में अभियंताओं ने तल्ख शब्दों में कहा कि अब यह लड़ाई अधिकार और आत्मसम्मान से जुड गयी है। जब तक समस्याओं का समाधान व मांग पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघ ने रोके गए पांच अभियंताओं का वेतन तत्काल जारी करने, जनपद सचिव इं. संजीव कुमार श्रीवास्तव के संबंध में जारी आदेश लागू करने, कार्यालय में भयमुक्त, सम्मान जनक और स्वस्थ वातावरण मे कार्य सुनिश्चित कराने की मांग की है। जानकारो की माने तो जब कर्मचारी धरने पर हों, अभियंताओं का वेतन रुका हो, मुख्य अभियंता के निर्देशों के पालन पर सवाल उठ रहे हों और विभाग का मुखिया बताए जा रहे अधिकारी मुख्यालय छोडकर गायब हों, तब यह विवाद साधारण कार्यालयी मतभेद नहीं रह जाता। बल्कि यह मामला अब सीधे-सीधे प्रशासनिक संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता और विभागीय जवाबदेही का गंभीर सवाल बन जाता है।
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