—- बालू की बोरी में दब गई इंसाफ की आवाज़? कुबेरस्थान पुलिस पर उगाही, दबंगई और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप।
कुशीनगर, 09 जून (आरएनएस)। जनपद के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के जंगल पचरुखिया गांव से सामने आया एक वायरल वीडियो पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। वीडियो में दो पुलिस कर्मी एक महिला को जबरन पकड़कर खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा मौके पर मौजूद ग्रामीण पुलिस पर अभद्रता, मारपीट और धमकी देने के आरोप लगा रहे हैं। इस दौरान एक युवक आक्रोश में पुलिस कर्मी को थप्पड़ भी मार देता है। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे मामले को लेकर पुलिस प्रशासन कटघरे में खड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार बीते 22 मई को बालू लदी एक ट्रक ने सड़क के किनारे खड़े 33 वर्षीय संदीप को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल संदीप को पहले मेडिकल कॉलेज कुशीनगर और फिर गोरखपुर रेफर किया गया। जहां 1 जून को उसकी मौत हो गई।
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बालू लदे ट्रक को घेर लिया और कथित तौर पर उसमें तोडफ़ोड़ की। पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया। यहीं से शुरू हुई वह कहानी, जिसकी स्क्रिप्ट खुद कुबेरस्थान पुलिस ने लिखी और खुद अपनी भूमिका को ही संदेह के घेरे में खडी हो गयी।
इनसेट– 55 लोगों पर कार्रवाई होगी कहकर गांव में शुरू हुई दबिश– ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद कुबेरस्थान थाने के दो सिपाही लगातार गांव में दबिश देने लगे। लोगों का कहना है कि तोडफ़ोड़ के नाम पर 55 लोगों के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई की बात कही गई और इसके बाद बिना महिला पुलिस कर्मी के घरों में घुसकर छापेमारी शुरू कर दी गई।ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने घरों में घुसकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। गालियां दीं और कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसों की मांग की।गांव की नजमा खातून का आरोप है कि पुलिसकर्मी उनके घर में घुस आए जबकि घर में केवल नई-नवेली दुल्हन मौजूद थी। जब उनसे पूछताछ की गई तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उल्टा कथित तौर पर कहा गया कि बचना है तो 25-25 हजार रुपये दो, नहीं तो जेल जाओ। बेशक नगमा सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा लगाये गये यह आरोप सही हैं तो रिश्वत खोरी और कानून के रक्षक पर ही कानून तोडऩे का आरोप है।
इनसेट– सवाल:- जब्त ट्रक की बालू आखिर गई कहां?– मामले का सबसे सनसनीखेज आरोप ट्रक में लदी बालू को लेकर है। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली लगवाकर ट्रक में लदी पूरी बालू उतरवाई और उसे एक निजी दुकानदार को बेच दिया। इसके बाद खाली ट्रक को थाने लेकर चली गयी। विधि विशेषज्ञ कहते है
यह आरोप सत्य हैं तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी अभिरक्षा में रखी गई संपत्ति के कथित दुरुपयोग और साक्ष्यों के साथ से छेड़छाड़ करने जैसा गंभीर मामला बनता है।
इनसेट– तोडफ़ोड़ का आरोप, फिर 151 में जेल क्यों?– ग्रामीणों का कहना है कि संतोष मद्धेशिया और दुर्गेश खटीक को पुलिस पकड़कर थाने ले गई। आरोप है कि उनसे भी पैसों की मांग की गई और रकम न मिलने पर उन्हें धारा 151 के तहत चालान कर जेल भेज दिया गया। यहां बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में मामला तोडफ़ोड़ का था और ट्रक मालिक ने तहरीर दिया था, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ? और यदि मामला इतना गंभीर नहीं था तो फिर निजी मुचलके पर छोड़े जाने योग्य धारा में जेल भेजने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? वायरल वीडियो अब पूरे घटनाक्रम का केंद्र बन गया है। वीडियो में दिख रही कथित पुलिसिया सख्ती और ग्रामीणों के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला पुलिस कर्मी के बिना महिलाओं के घरों में दबिश क्यों? कार्रवाई के नाम पर पैसों की मांग के आरोपों की जांच कौन करेगा? जब्त ट्रक की बालू का हिसाब किसके पास है? अगर तोडफ़ोड़ हुई थी तो ट्रक मालिक द्वारा तहरीर कब दी गई? मुकदमा कब दर्ज हुआ है? और दोनो युवको को जेल कब भेजा गया? इन सभी सवालो का जबाब निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट ह़ोगा। फिलहाल वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों ने कुबेरस्थान पुलिस की कार्य शैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच न केवल पुलिस की साख के लिए जरूरी है, बल्कि उन सवालों के जवाब के लिए भी आवश्यक है जो यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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