जबलपुर 9 जून (आरएनएस)। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन की आयोजित बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिजली कंपनियों में 50 से अधिक पदों पर नई भर्ती की स्वीकृति का स्वागत करते हुए फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बिजली कंपनियों के लिए नए जीवनदान के समान है, लेकिन नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले वर्षों से लंबित कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान किया जाना भी आवश्यक है।
राकेश पाठक ने कहा कि वर्ष 2000 से 2012 के बीच मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल तथा विभिन्न बिजली कंपनियों में कार्यरत जिन कर्मचारियों का असामयिक अथवा सामान्य निधन हुआ, उनके आश्रितों को आज तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकी है। ऐसे सभी पात्र मृतक आश्रितों को बिना किसी शर्त नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि 15 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को उनके अनुभव के आधार पर बिना परीक्षा नियमित अथवा संविलयित किया जाए तथा वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को नई भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर नियमित रोजगार का अवसर दिया जाए।
फेडरेशन ने कहा कि बिजली कंपनियों में वर्ष 2009 से 2018 के पूर्व नियुक्त परीक्षण सहायक, संयंत्र सहायक एवं कार्यालय सहायक श्रेणी-3 के कर्मचारियों की वेतन विसंगति अब तक दूर नहीं हुई है। सातवें वेतन आयोग के अनुरूप उनका ग्रेड-पे और मूल वेतन संशोधित कर तीन अतिरिक्त वेतनवृद्धियां प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी तथा संविदा कर्मचारियों के लिए एकमुश्त गृह जिला स्थानांतरण नीति लागू की जाए, जिससे उन्हें अपने गृह जिले में सेवाएं देने का अवसर मिल सके।
राकेश पाठक ने कहा कि वर्ष 1991 के कर्मचारियों की वेतन विसंगति के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दिया जा चुका है। इस निर्णय को सभी बिजली कंपनियों में लागू कर संबंधित कर्मचारियों को उसका लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने सेल्फ लर्निंग एंड एडवांसमेंट पॉलिसी के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त लाइन परिचारकों एवं परीक्षण सहायकों को कनिष्ठ अभियंता (वितरण) की सीधी भर्ती में पात्र घोषित करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी बिजली कंपनियों में विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अलग निगम या कंपनी गठित की जानी चाहिए, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति हो, दुर्घटनाओं में कमी आए और उनका शोषण समाप्त हो सके।
फेडरेशन ने यह भी मांग की कि अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनर्स को पूर्व की भांति बिजली बिल में 50 प्रतिशत की छूट दी जाए। वर्ष 2018 के बाद नियुक्त कार्यालय सहायकों का वेतन पूर्व निर्धारित वेतनमान के अनुरूप किया जाए तथा समान कार्य के लिए समान वेतन संबंधी उच्च न्यायालय के निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके अलावा राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(6) के नाम पर वर्ष 2000 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त कर उन्हें महंगाई भत्ते एवं एरियर का पूरा लाभ दिया जाए। फेडरेशन ने यह भी मांग की कि बिजली कंपनियों के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स की पेंशन की गारंटी राज्य शासन अपने स्तर पर सुनिश्चित करे।
बैठक में फेडरेशन के उपाध्यक्ष उमाशंकर मेहता, एन.के. यादव, बी.एस. राठौर, रामेश्वर गांगे, आर.के. कौशिक, अवसार अहमद, गोपाल चौहान, कार्तिक शर्मा, मदन वर्मा, वीरेंद्र मिश्रा, सुनील पटेल, प्रियंका यादव, सूरज मल आर्य, जे.एल. जोशी, ए.के. पांडे, डी.के. माथुर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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