विकासनगर,09 जून(आरएनएस)। कालसी ब्लॉक के नागथात स्थित इंडियन रेडक्रॉस विभाग का मातृ शिशु कल्याण चिकित्सालय बदहाल है। कभी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा यह अस्पताल अब संसाधनों और चिकित्सकीय स्टाफ के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित किए जाने की मांग उठाई है। नागथात स्थित यह चिकित्सालय वर्ष 1964 से संचालित किया गया था। वर्ष 1999 में अस्पताल का नया भवन तैयार किया गया, जिसमें बिजली, पानी, गेस्ट हाउस और स्टाफ क्वार्टर जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। शुरुआत में अस्पताल में महिला चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, पीएचएन, एएनएम, महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षिका सहित कुल 22 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन 2008 में धनाभाव के चलते अस्पताल का संचालन प्रभावित होने लगा और धीरे-धीरे चिकित्सक, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती समाप्त हो गई। वर्तमान में यहां केवल छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नागथात का यह चिकित्सालय करीब 80 गांवों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। एक समय यहां क्षेत्र की महिलाओं की डिलीवरी भी कराई जाती थी, लेकिन वर्तमान स्थिति में महिलाओं को जांच और उपचार के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर विकासनगर और कालसी जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में भी उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। आपात स्थिति में क्षेत्रवासियों के लिए 108 एंबुलेंस सेवा ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि अस्पताल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित कर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से बहाल किया जाए।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद जगी उम्मीद: सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौनसार बावर सांस्कृतिक एवं खेल महोत्सव में शिरकत की थी, जिसमें जौनसार बावर सांस्कृतिक एवं खेल महोत्सव पुनरुथान समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें नागथात का मातृ शिशु कल्याण चिकित्सालय को राज्य सरकार के अधीन लेकर एलौपैथिक अस्पताल के रूप में संचालित करने की मांग की। समिति के अध्यक्ष नरेश तोमर और महासचिव नरेंद्र तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जल्द ही इस पर निर्णय लेने की बात कही है। जिससे अस्पताल के दोबारा संचालन की उम्मीद जग गई है।
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