नई दिल्ली 10 June (Rns)- वैश्विक सुरक्षा और सामरिक संतुलन के बीच भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। हथियारों और सैन्य क्षमताओं पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु वॉरहेड को परिचालन (ऑपरेशनल) स्थिति में तैनात किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक भारत परमाणु वॉरहेड और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचाने वाले मिसाइल या अन्य प्लेटफॉर्म को अलग-अलग स्थानों पर रखता रहा है। हालांकि हालिया घटनाक्रम संकेत देते हैं कि भारत ने अपनी दशकों पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए कुछ परमाणु हथियारों को सीधे डिलीवरी सिस्टम से जोड़ दिया है या उन्हें ऐसे सैन्य ठिकानों पर तैनात किया है जहां से जरूरत पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल किया जा सके।
बढ़ी रणनीतिक तैयारी के संकेत
SIPRI का मानना है कि भूमिगत मिसाइल साइलो, कैनिस्टर-आधारित मिसाइल प्रणालियों और परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) में हथियारों की तैनाती भारत की बढ़ती रणनीतिक तैयारी को दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब समुद्र में निरंतर प्रतिरोधक गश्त (Deterrence Patrol) की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।
190 परमाणु हथियारों का अनुमानित भंडार
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी अधिक बताई गई है। ये हथियार वायुसेना, भूमि आधारित मिसाइलों और परमाणु पनडुब्बियों से मिलकर बने भारत के परमाणु त्रिकोण (Nuclear Triad) का हिस्सा हैं।
शांति काल में भी तैनाती की संभावना
SIPRI ने कहा है कि लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि भारत शांति काल में अपने परमाणु वॉरहेड को लॉन्चरों से अलग रखता है। लेकिन हाल के वर्षों में मिसाइलों के कैनिस्टराइजेशन और समुद्री प्रतिरोधक गश्त जैसी गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि भविष्य में कुछ हथियारों को शांति काल में भी लॉन्च प्रणालियों के साथ रखा जा सकता है।
‘नो फर्स्ट यूज’ नीति बरकरार
हालांकि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत अब भी “नो फर्स्ट यूज” (No First Use) सिद्धांत का पालन करता है, जिसके तहत वह परमाणु हथियारों का पहला इस्तेमाल नहीं करेगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि परमाणु हथियारों का उपयोग केवल किसी परमाणु हमले के जवाब में प्रतिउत्तर कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की परमाणु क्षमता का उद्देश्य हथियारों की दौड़ में शामिल होना नहीं, बल्कि संभावित विरोधियों को किसी भी आक्रामक कदम से रोकने के लिए विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।

