लखनऊ 11 जून (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने निर्माण कार्यों में श्रमिकों के हितों की सुरक्षा और श्रम कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। निगम ने सभी विद्युत वितरण निगमों और केस्को को भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियमों के तहत लेबर सेस, अधिष्ठान पंजीकरण और श्रमिक पंजीकरण संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।यूपीपीसीएल के निदेशक (कार्मिक, प्रशासन एवं प्रबंध) डॉ. जॉन मथाई द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन और श्रम विभाग के निर्देशों के क्रम में निर्माण कार्यों से संबंधित सभी निविदाओं और अनुबंधों में श्रमिक पंजीकरण तथा लेबर सेस संबंधी शर्तों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।श्रम विभाग के अनुसार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 के तहत ऐसे सभी निर्माण कार्य, जहां वर्ष के किसी भी दिन 10 या उससे अधिक निर्माण श्रमिक कार्यरत हों, उनका अधिष्ठान पंजीकरण कार्य प्रारंभ होने के 60 दिनों के भीतर कराया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के अंतर्गत निर्माण लागत पर एक प्रतिशत उपकर (सेस) जमा कराने का भी प्रावधान है।शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई सरकारी विभागों एवं निर्माण एजेंसियों द्वारा निर्माण कार्यों के बावजूद अधिष्ठान पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है और न ही निर्धारित एक प्रतिशत उपकर की धनराशि समय से जमा कराई जा रही है। कई मामलों में संविदाकारों के बिलों से उपकर की कटौती तो की जाती है, लेकिन उसे नियमानुसार उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के खाते में जमा नहीं कराया जाता।इसी को देखते हुए यूपीपीसीएल ने अपने सभी सहयोगी वितरण निगमों को निर्देश दिया है कि निर्माण कार्यों से संबंधित निविदा दस्तावेजों में श्रमिक एवं प्रतिष्ठान पंजीकरण की शर्तें पहले से शामिल की जाएं। साथ ही किसी भी भुगतान से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित प्रतिष्ठान और वहां कार्यरत सभी श्रमिकों का विधिवत पंजीकरण कराया जा चुका है।निर्देशों के अनुसार नामित उपकर निर्धारण और संग्रहण अधिकारी निर्माण कार्य पूरा होने के अधिकतम छह माह के भीतर उपकर निर्धारण आदेश पारित करेंगे। संग्रहित उपकर की धनराशि को निर्धारित समय के भीतर उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के खाते में जमा कराते हुए इसकी सूचना संबंधित श्रम कार्यालय को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। यह पूरी प्रक्रिया उपकर पोर्टल के माध्यम से संपादित की जाएगी।श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपकर की धनराशि का उपयोग पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं में किया जाता है। यदि उपकर समय से जमा नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिनियम के तहत दो प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज तथा निर्धारित परिस्थितियों में अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया जा सकता है।यूपीपीसीएल ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों सहित केस्को को निर्देश दिया है कि इन प्रावधानों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्माण श्रमिकों को कानून के तहत मिलने वाले लाभ समय पर उपलब्ध कराए जा सकें और श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
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