लखनऊ 11 जून (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए. के. शर्मा ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने पत्र जारी कर विद्युत विभाग में कार्मिक प्रबंधन, उपभोक्ता हितों, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई मामलों पर स्पष्टीकरण और सुधारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा की है।ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि वह पूर्व में भी कई बार पत्र लिखकर विद्युत तंत्र में लंबे समय से कार्यरत अनुभवी और कुशल कर्मियों को हटाकर उनके स्थान पर नए अथवा अकुशल कर्मियों की नियुक्ति किए जाने पर चिंता जता चुके हैं। इसके बावजूद यह प्रक्रिया नहीं रुकी, जिसके कारण अब विद्युत व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने सहारनपुर के बेहट डिवीजन में लंबे समय से कार्यरत एक लाइनमैन को हटाए जाने के मामले का उल्लेख करते हुए इसकी जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।मंत्री ने कहा कि हजारों कुशल कर्मियों को अनावश्यक रूप से हटाना किसी भी व्यवस्था के लिए तकनीकी, प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि इस प्रकार के निर्णयों के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं।पत्र में गर्मी के दौरान विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। मंत्री ने कहा कि अधिकांश विद्युत कर्मियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सराहनीय कार्य किया, लेकिन कुछ कर्मचारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण सरकार की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा स्थानांतरण सत्र के दौरान आवश्यकतानुसार उनका तबादला करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है।ए. के. शर्मा ने मई के अंतिम सप्ताह में आए आंधी-तूफान से विद्युत अवसंरचना को हुए नुकसान का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि 28 और 29 मई को हुई प्राकृतिक आपदा के बाद विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य की आवश्यकता थी। इस दौरान समीक्षा बैठक आयोजित करने के लिए संपर्क करने पर यह जानकारी मिली कि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी मुख्यालय से बाहर थे। मंत्री ने इसे जनहित के विपरीत और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए भविष्य में मुख्यालय छोडऩे से पहले उन्हें अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।पत्र में उपभोक्ताओं पर प्रस्तावित ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मंत्री ने कहा कि 29 मई 2026 को यूपीपीसीएल द्वारा जून माह में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत एफपीपीएएस अधिभार वसूले जाने संबंधी निर्देश जारी किए गए, जिसकी जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई। इस निर्णय के बाद समाचार माध्यमों और सामाजिक मंचों पर सरकार के विरुद्ध नकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।ऊर्जा मंत्री ने प्रश्न उठाया कि इतने व्यापक प्रभाव वाले निर्णय से पूर्व विभागीय मंत्री की सहमति या कम से कम पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई। उन्होंने भविष्य में ऐसे मामलों में समुचित समन्वय और पूर्व जानकारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।पत्र के अंत में मंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा दिए गए निर्देशों को शासन का निर्देश माना जाए तथा उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इस पत्र को ऊर्जा विभाग और यूपीपीसीएल के भीतर महत्वपूर्ण प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जो विद्युत व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर समन्वय पर जोर देता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

