लखनऊ 11 जून (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। यह क्षेत्र किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एक प्रभावी साधन साबित होगाउप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा को समान महत्व देते हुए आगे बढ़ रही है। सौर ऊर्जा आधारित औद्योगिक मॉडल भविष्य की आवश्यकता है, जो उद्योगों की उत्पादन लागत कम करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगा।उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों, अनुदानों और निवेश सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए आगे आएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।
इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में एप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त 10 निवेश प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा निर्धारित शर्तों के साथ उन्हें स्वीकृति के लिए संस्तुत किया गया।स्वीकृत प्रस्तावों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना, आधुनिक राइस मिल, मसाला एवं कृषि उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयों के साथ-साथ मेकरोनी, पास्ता, नूडल्स एवं अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पाद निर्माण इकाइयों की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई गति मिलने के साथ उत्पादन क्षमता में वृद्धि, ऊर्जा दक्षता और स्थानीय कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।बैठक में जानकारी दी गई कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 540 इकाइयों को लाभान्वित किया जा चुका है। इनमें से करीब 130 इकाइयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं अथवा उनकी स्थापना की प्रक्रिया जारी है।अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने बताया कि राइस मिल, ऑयल मिल, फ्लोर मिल, कैटल फीड इकाइयों, रेडी-टू-कुक प्लांट, मशरूम उत्पादन केंद्रों और बेकरी संयंत्रों सहित विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ऑन-ग्रिड सौर ऊर्जा प्रणाली को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ऊर्जा लागत में कमी आने के साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण के लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।बैठक के अंत में एप्रेजल समिति ने निवेशकों को निर्धारित समय-सीमा और सभी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर बल दिया।
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