वित्त पोषण योजना पर सीएमओ की चुप्पी ने हजारों मरीजों को भूख और बेबसी के हवाले किया
सुलतानपुर 11 जून (आरएनएस )। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और कथित प्रशासनिक उदासीनता ने इस महत्वाकांक्षी अभियान की जड़ों में ही म_ा डाल दिया है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के हजारों टीबी पीडि़त मरीजों को पिछले लगभग एक वर्ष से वित्त पोषण योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जिस योजना का उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनकी बीमारी से लडऩे की क्षमता बढ़ाना था, वह योजना जिले में फाइलों और बैठकों तक सिमटकर रह गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मरीजों के खाते में सहायता राशि ही नहीं पहुंचेगी, तो वे पौष्टिक भोजन कहां से लाएंगे? क्या स्वास्थ्य विभाग यह मान चुका है कि टीबी मरीज केवल सरकारी दावों और प्रेस विज्ञप्तियों से स्वस्थ हो जाएंगे। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि लाभार्थियों की लंबी सूची महीनों से भुगतान का इंतजार कर रही है, लेकिन विभागीय जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। मरीज कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि अफसरशाही वातानुकूलित कमरों में योजनाओं की सफलता के आंकड़े गिनने में व्यस्त दिखाई दे रही है। विडंबना देखिए, एक तरफ मंचों से टीबी मुक्त भारत के नारे बुलंद किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि मरीजों को दो वक्त का पौष्टिक भोजन जुटाना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह अभियान मरीजों के लिए चल रहा है या सिर्फ सरकारी रिपोर्टों की शोभा बढ़ाने के लिए। यदि सूत्रों के दावे सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि उन गरीब मरीजों के साथ अन्याय है जो बीमारी से ज्यादा व्यवस्था की बेरुखी से जूझ रहे हैं। जिन लोगों के कंधों पर योजना को धरातल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, उनकी निष्क्रियता ने सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
अब जिले की जनता जानना चाहती है कि आखिर हजारों मरीजों का पैसा कहां अटका है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? और सबसे महत्वपूर्ण क्या स्वास्थ्य विभाग नींद से जागकर तत्काल बकाया भुगतान सुनिश्चित करेगा या फिर टीबी मुक्त भारत का सपना फाइलों में ही दम तोड़ता रहेगा। जब तक मरीजों के खाते में सहायता राशि नहीं पहुंचती, तब तक सफलता के दावे केवल खोखले नारे और कड़वी विडंबना बनकर रह जाएंगे।
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