शिकायतकर्ता से वार्ता में विभाग की अंदरूनी कलह और भ्रष्टाचार के आरोपों की खुली परतें
सुलतानपुर 11 जून (आरएनएस )। खाद्य सुरक्षा विभाग में कथित अवैध वसूली और कर्मचारियों को संरक्षण देने के आरोपों के बीच आइसक्रीम फैक्ट्री संचालक खुदौली निवासी राजेंद्र सरोज और सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) अजीत कुमार के बीच हुई फोन वार्ता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बातचीत के दौरान हुई बातों से प्रतीत होता है कि विभाग के भीतर लंबे समय से चल रही अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी है, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं को आश्वासन देकर मामला शांत कराने की कोशिश की जा रही है।
राजेंद्र ने अधिकारी से बताया कि जांच के दौरान उनकी पत्नी से ?20 हजार की मांग की गई थी और रकम नहीं देने पर उसकी फैक्ट्री का सैंपल भर लिया गया। उसका कहना है कि पिछले वर्ष भी उसकी इकाई पर कार्रवाई की गई थी और इस बार भी उसे ही निशाना बनाया गया। लगातार कार्रवाई और दबाव के कारण उसने फैक्ट्री बंद करने और आत्महत्या तक की बात सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा से कही। कथित फोन वार्ता में सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) ने शिकायतकर्ता को कार्यालय बुलाकर पूरी बात सुनने और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। बातचीत में सहायक आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) ने यह भी कहा कि विभाग में कुछ लोग लंबे समय से गलत तरीके अपनाते आ रहे हैं। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि यदि विभागीय स्तर पर ऐसी गतिविधियों की जानकारी पहले से है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई कठोर कदम क्यों नहीं उठाया गया।
हैरानी की बात यह रही कि शिकायतकर्ता को कथित तौर पर मीडिया से दूरी बनाए रखने और मामले को सार्वजनिक न करने की सलाह भी दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायतें निराधार हैं तो उन्हें खुलकर सामने आने देने के बजाय गोपनीय रखने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। जिस कर्मचारी का नाम शिकायतकर्ता ले रहा है, उसके खिलाफ पहले भी विभिन्न तहसीलों से शिकायतें रही है, लेकिन आरोपों के बावजूद वह विभागीय कार्रवाई से बचता रहा। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि विभाग में कुछ लोगों को संरक्षण प्राप्त है। बातचीत के दौरान जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा कही गई कहावत सावन के अंधे को हमेशा हरियाली ही दिखती है भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यह टिप्पणी किसकी ओर इशारा है, शिकायतकर्ता या फिर कर्मचारियों की ओर यह स्पष्ट नहीं हो सका। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वयं विभागीय स्तर पर गड़बडिय़ों की जानकारी होने की बात सामने आ रही है, तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर शिकायतकर्ता को केवल आश्वासन का लॉलीपॉप देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

