हैदराबाद 13 June (Rns) । समकालीन और आधुनिक युद्ध कला के बदलते तौर-तरीकों के बीच देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना के युवा जांबाजों को आने वाले समय की जटिल सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने का आह्वान किया है। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित 217वें कोर्स की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड (सीजीपी) को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उन्होंने नए अधिकारियों को “एडाप्ट, अडॉप्ट और अमेंड” (परिस्थितियों के अनुकूल बनना, नई तकनीकों को अपनाना और नीतियों में सुधार करना) का मूलमंत्र दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के दौर में युद्ध का मैदान केवल लड़ाकू विमानों, तोपों या थल सैनिकों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, एडवांस्ड सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर डोमेन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों ने इसका पूरा ढांचा ही बदल कर रख दिया है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वायुसेना के स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा में इस बल की भूमिका हमेशा से ढाल और तलवार दोनों जैसी रही है। उन्होंने वर्ष 1947-48 के कश्मीर संघर्ष के दौरान किए गए ऐतिहासिक ‘श्रीनगर एयरलिफ्ट’ और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ढाका पर किए गए अचूक हवाई हमलों का स्मरण कराया, जिन्होंने इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया था। इसके साथ ही उन्होंने हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे वायुसेना ने आतंकवादियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में बेजोड़ रणनीति और सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन कामयाबियों के पीछे केवल हमारे पास मौजूद स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि भारतीय जांबाजों का अद्वितीय साहस, अनुशासन और स्मार्ट वर्क की काबिलियत भी शामिल रही है।

