New Delhi 15 J une (Rns) /- पूरी दुनिया के व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले हर 6 नाविकों में से एक भारतीय है। हाल ही में एक अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत के बाद भारत सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजी शिपिंग) ने सभी समुद्री भर्ती एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले आदेश तक किसी भी भारतीय नाविक को संघर्ष वाले क्षेत्रों में नई ड्यूटी पर बिल्कुल न भेजा जाए। ईरान युद्ध शुरू होने के समय इस पूरे इलाके में करीब 23 हजार भारतीय नाविक तैनात थे, जिनमें से आधे से ज्यादा यूएई में हैं।
वहीं, इंटरनेशल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक 20 हजार से ज्यादा नाविक अभी भी फारस की खाड़ी में अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं।
सरकार की तरफ से जारी की गई नई एडवाइजरी में साफ तौर पर कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को अब अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी और सभी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। युद्ध के मौजूदा हालातों को देखते हुए बीच समंदर में जरूरत पड़ने पर क्रू बदलने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए संबंधित नाविक की सहमति होना अनिवार्य शर्त होगी। बिना सहमति के किसी को खतरे में नहीं डाला जा सकेगा।
बीते 8, 10 और 11 जून को अमेरिकी नौसेना ने मारिवेक्स, सेटेबेलो और जलवीर नाम के तीन व्यापारिक जहाजों पर हेलफायर मिसाइलों से जोरदार हमला किया था। मारिवेक्स और जलवीर में तो कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन सेटेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों- एक चीफ इंजीनियर, एक इंजन फिटर और एक डेक कैडेट की जान चली गई। अमेरिकी सेना का आरोप है कि ये जहाज ईरानी तेल से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे और निर्देश नहीं मान रहे थे।
हालांकि, सेटेबेलो का संचालन करने वाली कंपनी ‘आईओएस मरीन एफजेडई’ ने अमेरिका के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का स्पष्ट कहना है कि जहाज 10 दिनों से एक ही जगह पर खड़ा था, उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी और उनका ईरानी तेल या बंदरगाहों से कोई लेना-देना नहीं है।
निर्दोष भारतीय नाविकों की जान जाने के बाद कूटनीतिक स्तर पर भी तल्खी बढ़ गई है। भारत ने इस गंभीर मुद्दे पर अमेरिका के सामने कड़ा ऐतराज जताया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधे तौर पर कहा है कि निर्दोष व्यापारिक जहाजों पर इस तरह के मिसाइल हमले करना किसी भी लिहाज से सही नहीं है।

