भोपाल 15 जून (आरएनएस)। रुद्राक्ष किंग्सटन परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने धार्मिक आस्था, पूजा-पद्धति और विवाह परंपराओं को लेकर कई बयान दिए। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जिनकी पूजा सनातन धर्म में पूजनीय नहीं मानी गई है, उनकी आराधना करने से परिवार में संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
कथावाचक ने आधुनिक विवाह परंपराओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में विवाह गोधूलि बेला में संपन्न कराने की परंपरा थी, जबकि वर्तमान में अधिकांश विवाह देर रात आयोजित किए जाते हैं। उनके अनुसार, रात्रि का समय विवाह के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है और इस कारण वैवाहिक जीवन में तनाव बढऩे की आशंका रहती है।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि किसकी पूजा करनी है और किसकी नहीं। उन्होंने कहा कि जो पूजने योग्य नहीं हैं, उनकी पूजा करने से आध्यात्मिक हानि होती है। उनके अनुसार, शास्त्रों में पूजनीय और अपूज्य के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया है, जिसका पालन करना आवश्यक है।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि कई लोग किसी मनोकामना की पूर्ति के बाद अजमेर शरीफ जाकर चादर चढ़ाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने के बाद देवता उनकी पूजा स्वीकार नहीं करते, क्योंकि उन्होंने ऐसे स्थान पर श्रद्धा व्यक्त की, जो उनके अनुसार पूजनीय नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था का केंद्र शास्त्रसम्मत होना चाहिए।
देवकीनंदन ठाकुर ने अभिभावकों से बच्चों को भी कथा और धार्मिक आयोजनों में साथ लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई बार जो बातें बड़े लोगों को समझ में नहीं आतीं, वे बच्चे आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। उनके अनुसार संस्कारों का बीजारोपण बचपन से ही किया जाना चाहिए।

