जौनपुर 16 जून (आरएनएस ) ।श्री राम कथा महोत्सव के विश्राम दिवस पर वाराणसी के मानस कोविद डॉ. मदन मोहन मिश्र ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और राम राज्य की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम लोगों के दिलों में बसते हैं, यही कारण है कि सदियों बाद भी पूरी दुनिया उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ पूजती है।डॉ. मिश्र ने कहा कि इतिहास में अनेक राजा हुए, जो अपने-अपने किलों और महलों में रहते थे, लेकिन समय के साथ वे केवल इतिहास का हिस्सा बनकर रह गए। वहीं भगवान श्रीराम लोगों के हृदयों में निवास करते हैं और आज भी जन-जन की आस्था के केंद्र बने हुए हैं।उन्होंने राम राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या लौटने के बाद भगवान श्रीराम ने सबसे पहले माता कैकेयी से मिलकर उन्हें सम्मान दिया। यह उनके आदर्श चरित्र और परिवार के प्रति सम्मान की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम को वही व्यक्ति प्रिय है जो उनके बताए मार्ग पर चलता है।
डॉ. मिश्र ने बताया कि श्रीराम ने स्वयं कहा था कि यदि वे कभी नीति और धर्म के विरुद्ध कोई बात कहें, तो लोग बिना किसी भय के उन्हें रोक सकते हैं। उन्होंने इसे राम राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए कहा कि उस समय समाज में समानता और न्याय की भावना सर्वोपरि थी। लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए कहा कि उस समय समाज में समानता और न्याय की भावना सर्वोपरि थी। राजघाट पर चारों वर्णों के लोग एक साथ स्नान करते थे, जो सामाजिक समरसता का प्रतीक था। डॉ. अखिलेश चंद पाठक ने पुरुषोत्तम मास महात्म्य पर सारगर्भित प्रवचन दिया और श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति एवं आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत कराया।
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