नई दिल्ली,16 जून(आरएनएस)। झूठी शान के लिए हत्या होने के डर से एक इंटर-कास्ट कपल की मदद के लिए आगे आते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें महिला के माता-पिता को उनसे मिलने की इजाजत दी गई थी, और उनकी सुरक्षा की चिंता जताई गई थी.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस उज्जल भुयान और अरुण पल्ली की बेंच ने की. बेंच ने दंपति की अर्जी पर दखल देते हुए कहा कि टॉप कोर्ट ने पहले उन्हें प्रोटेक्शन दिया था, जब उन्होंने महिला के रिश्तेदारों से जान का खतरा बताया था. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगाने का फैसला किया और मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की.
बेंच ने कहा, हमें इस तरह के दकियानूसी सोच वाले लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जो दंपति को परेशान करे. यह ठीक नहीं है. महिला के माता-पिता के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट का मकसद सिर्फ उसके और उसके पिता के बीच मुलाकात कराना था. वकील ने जोर देकर कहा कि इस आदेश का मतलब किसी भी तरह से कपल को मिली सुरक्षा को कम करना नहीं है.
कपल के वकील ने यह भी शिकायत की कि राजस्थान पुलिस के लोग लगातार उनके घर के बाहर तैनात थे और उनके खिलाफ दर्ज मामलों के संबंध में उनके रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे. वकील ने कहा, मुझे सुरक्षा दी गई है, लेकिन राजस्थान पुलिस मेरे घर पर बैठी है. राजस्थान सरकार के वकील ने बेंच को भरोसा दिलाया कि उनके घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी अब कपल से मिलने नहीं आएंगे. बेंच ने कपल की अर्जी पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा और उसका भरोसा रिकॉर्ड किया.
30 अप्रैल को टॉप कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की यह बात रिकॉर्ड की थी कि वह कपल को सुरक्षा देगी. टॉप कोर्ट ने कपल को उत्तर प्रदेश के बागपत में आदमी के माता-पिता के घर में रहने की इजाजत दी थी.
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