अमानीगंज-अयोध्या 17 जून (आरएनएस )। प्रतिभा किसी आयु की मोहताज नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और परिश्रम निरंतर हो, तो सफलता के मार्ग में उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इस कथन को चरितार्थ कर रहे हैं अयोध्या जनपद के युवा कवि, लेखक एवं उपन्यासकार विपिन यादव ‘विपिनÓ,जिन्होंने कम उम्र में ही हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। 27 दिसंबर 2007 को अयोध्या जनपद के एक ग्रामीण परिवेश में जन्मे विपिन यादव ‘विपिनÓ बचपन से ही साहित्य के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। हिंदी,अंग्रेज़ी तथा अवधी भाषा में लेखन करने वाले विपिन की रचनाओं में देशभक्ति,सामाजिक चेतना,युवा विचार और मानवीय जीवन-मूल्यों का सशक्त एवं प्रभावशाली चित्रण देखने को मिलता है। साहित्य के प्रति समर्पण,निरंतर अध्ययन और सृजनशील सोच के बल पर उन्होंने अल्पायु में ही अनेक उल्लेखनीय रचनाओं का सृजन किया है। उनकी चर्चित कृतियों में “दिल में हिंदुस्तान लिए”, “भावनाओं की नुमाइश” तथा “एक नया इतिहास लिख दो” विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कविताएं,लेख और विचार प्रतिष्ठित समाचार पत्र अमर उजाला सहित विभिन्न साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हो चुके हैं,जिन्हें पाठकों द्वारा सराहा भी गया है।
विपिन यादव ‘विपिनÓ की साहित्यिक यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। उनकी लेखनी केवल साहित्य सृजन तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना,राष्ट्रप्रेम और नैतिक मूल्यों के प्रसार का माध्यम भी है। अपनी रचनाओं के माध्यम से वे नई पीढ़ी को जागरूक करने और हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने का सतत प्रयास कर रहे हैं। युवा कवि,साहित्यकार विपिन यादव ‘विपिनÓ का मानना है कि दृढ़ इच्छाशक्ति,निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से कोई भी व्यक्ति अपनी मंजिल प्राप्त कर सकता है। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि प्रतिभा और लगन के सामने आयु कभी बाधा नहीं बनती। कवि विपिन यादव जनपद अयोध्या के विकासखंड अमानीगंज स्थित ग्राम पूरे तलई, रायपट्टी के निवासी हैं। इनके पिता श्री राजकरन यादव जी एक परिश्रमी एवं सम्मानित किसान हैं, जिनकी मेहनत, ईमानदारी और संस्कारों ने इनके व्यक्तित्व को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। कवि विपिन यादव की शैक्षिक, वैचारिक एवं व्यक्तित्वगत उन्नति में उनके पूज्य दादाश्री श्री विजय प्रगट यादव (बदंग) जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए विपिन यादव के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनकी दूरदर्शिता, अथक परिश्रम, त्याग, समर्पण और सतत मार्गदर्शन ने विपिन यादव के जीवन को नई दिशा प्रदान की। शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने से लेकर प्रत्येक कदम पर नैतिक संबल और प्रेरणा देने तक, दादाश्री ने सदैव अभिभावक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभाई। आज विपिन यादव जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके दादाश्री के अथक प्रयासों, आशीर्वाद और अटूट विश्वास की अमिट छाप विद्यमान है। कवि विपिन यादव अपनी समस्त उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता के संस्कारों तथा विशेष रूप से अपने पूज्य दादाश्री श्री विजय प्रगट यादव (बदंग) जी के त्याग, संघर्ष, मार्गदर्शन और स्नेहपूर्ण संरक्षण को देते हैं। उनके अमूल्य सहयोग और प्रेरणा ने विपिन यादव के जीवन को सफलता के पथ पर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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