नई दिल्ली,19 जून(आरएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश भर के पुलिस महानिदेशकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से उनके पास मौजूद आपराधिक डेटा को ऐसी खुफिया जानकारी (एक्शनेबल इंटेलिजेंस) में बदलने को कहा, जिस पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. उन्होंने कहा कि जानकारी का अपने आप में तब तक कोई खास मोल नहीं है, जब तक कि उससे अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और उन्हें सजा न दिलाई जा सके.
नई दिल्ली में 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन को संबोधित करते हुए, शाह ने महाभारत का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि महाभारत के महायुद्ध में जानकारी को खुफिया रणनीति में बदलने की भगवान कृष्ण की क्षमता ने ही आखिरकार जीत पक्की करने में मदद की थी.
शाह ने पुलिस बलों से अपराध की रोकथाम और जांच के लिए डेटा-आधारित तरीका अपनाने की अपील करते हुए कहा, जिस तरह कृष्ण ने महाभारत के दौरान जानकारी को खुफिया रणनीति में बदला था, उसी तरह हमारे पुलिस तंत्र को भी अपराध से लड़ते समय जानकारी को सटीक खुफिया सूचना में बदलना चाहिए. कार्यक्रम के दौरान, गृह मंत्री ने अभिज्ञान ऐप, सीआरपीआई सिस्टम, ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 और ई-फॉरेंसिक 2.0 को लॉन्च किया.
राष्ट्रीय डेटाबेस के महत्व पर जोर देते हुए, शाह ने कहा कि राज्यों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली और आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के नियमों का पूरा उपयोग करना चाहिए. उनके अनुसार, इन रिकॉर्ड्स को सिर्फ फाइलों या कंप्यूटर में जमा करके नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपराधों को रोकने और उन्हें सुलझाने के लिए इनका गहराई से विश्लेषण किया जाना चाहिए.
नाफिस पूरे भारत के फिंगरप्रिंट का एक डिजिटल डेटाबेस है. यह गिरफ्तार किए गए हर अपराधी को एक खास राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट नंबर देता है, जिससे उसे देश के किसी भी कोने में आसानी से ट्रैक किया जा सके. वहीं, आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 कानून प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस और जांच टीमों) को जांच के लिए गिरफ्तार या दोषी व्यक्तियों के शारीरिक और जैविक माप (जैसे फिंगरप्रिंट, डीएनए आदि) इक_ा करने और उन्हें सुरक्षित रखने का अधिकार देता है.
शाह ने इस बात पर गौर किया कि फिंगरप्रिंट के सबूत आज भी आपराधिक जांच में सबसे भरोसेमंद जरिया हैं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अब तक नाफिस डेटाबेस का केवल 10 प्रतिशत ही सही तरीके से इस्तेमाल हो पाया है. उन्होंने सभी पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया कि वे अगले एक साल तक पुलिसकर्मियों के लिए हर हफ्ते ट्रेनिंग सेशन आयोजित करें, ताकि इन प्रणालियों से मिलने वाले डेटा को इक_ा करने, उसका विश्लेषण करने और इस्तेमाल को बेहतर बनाया जा सके.
गृह मंत्री ने आपराधिक डेटाबेस का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें जांच एजेंसियों को अपराध के तरीकों को पहचानने, बार-बार अपराध करने वालों का प्रोफाइल तैयार करने, अपराधियों के व्यवहार को समझने और राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के आपराधिक नेटवर्क का पता लगाने में मदद कर सकती हैं.
उन्होंने पुलिस ट्रेनिंग प्रोग्रामों में सभी डिजिटल मॉड्यूल को शामिल करने की वकालत की और आपराधिक न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तकनीक की मदद से चार्जशीट का सारांश तैयार करने की अपील की.
गृह मंत्रालय के तहत हुए बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण का जिक्र करते हुए, शाह ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स ने देश भर के 17,840 पुलिस स्टेशनों को आपस में जोड़ दिया है. इसमें पुराने रिकॉर्ड्स सहित लगभग 37.86 करोड़ एफआईआर दर्ज हैं. इसके अलावा, 22,000 से अधिक अदालतों को इस डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा चुका है और पुराने मुकदमों के रिकॉर्ड भी इसमें शामिल किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास पहले से ही लगभग 2.70 करोड़ ई-प्रिजऩ (जेल) रिकॉर्ड, 34.48 लाख फॉरेंसिक केस रिकॉर्ड और 43.16 लाख अपराध से जुड़े डेटासेट जमा हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक एआई और खास सॉफ्टवेयर की मदद से जानकारी के इस विशाल भंडार का सही से विश्लेषण नहीं किया जाता, तब तक यह जांच में मदद करने के बजाय सिर्फ कागजी बोझ बनकर रह जाएगा.
शाह ने बताया कि 9.19 लाख से अधिक नशीले पदार्थों के अपराधियों का डेटा तैयार कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में हर उपलब्ध डेटाबेस को कार्रवाई के योग्य बनाया जाना चाहिए और इसे जमीन पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाना चाहिए.
चार साल पहले एनसीआरबी के भीतर बनाए गए मोडस ऑपेरंडी ब्यूरो (कार्य-पद्धति ब्यूरो – अपराधियों के तौर-तरीकों पर नजर रखने वाला विभाग) का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि यह ब्यूरो अपराधियों की तकनीकों का विश्लेषण करने और बढ़ते डेटा का सही इस्तेमाल करने में मुख्य भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा, पूरे भारत में अपराध नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए अपराध के तरीकों, बार-बार अपराध करने वालों और अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट (गैंग) से जुड़ी जानकारी इस ब्यूरो के जरिए ही आगे भेजी जानी चाहिए.
आगे की सोचते हुए, शाह ने प्रस्ताव रखा कि अगले साल के अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन की तैयारियां इसी मोडस ऑपेरंडी ब्यूरो के इर्द-गिर्द होनी चाहिए और इसका मुख्य ध्यान अपराध रोकने व जांच के लिए डेटा विश्लेषण के व्यावहारिक इस्तेमाल पर होना चाहिए.
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निपटारे के लिए शांति अदालतों की अवधारणा पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उपायों पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के साथ बातचीत चल रही है, और इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए समय पर न्याय मिलना बहुत जरूरी है.
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अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अपनानी होगी कृष्ण नीति: अमित शाह ने पुलिस को दिया नया मंत्र

New Delhi: Union Home Minister Amit Shah with National Crime Records Bureau Director Alok Ranjan and Intelligence Bureau Director Tapan Kumar Deka during the inauguration of the 26th All India Fingerprint Conference 2026 at the National Crime Records Bureau (NCRB) in Mahipalpur, New Delhi, on Friday, June 19, 2026. (Photo: IANS/Deepak Kumar)
