नारायणपुर, 21 जून (आरएनएस)। बस्तर में शांति, पुनर्वास और विश्वास निर्माण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए नारायणपुर पुलिस ने डीआरजी परिसर में ‘मैत्री कैफेÓ का शुभारंभ किया है। स्थानीय जनजातीय कला, बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्थापत्य शैली से सुसज्जित यह कैफे केवल खानपान केंद्र नहीं, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, जनसहभागिता और सामाजिक समरसता का नया केंद्र बनेगा।
20 जून को आयोजित उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर नगर पालिका परिषद नारायणपुर के अध्यक्ष इन्द्र प्रसाद बघेल, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
नारायणपुर पुलिस की इस पहल की विशेषता यह है कि मैत्री कैफे का निर्माण पूरी तरह विभागीय कर्मचारियों ने अपने श्रम, नवाचार और रचनात्मकता से किया है। कैफे के संचालन में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने की योजना है, जिससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका के साथ समाज की मुख्यधारा से जुडऩे का अवसर मिलेगा।
उद्घाटन के दौरान मंत्री केदार कश्यप ने आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर उनके पुनर्वास और स्वरोजगार संबंधी प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विकास, रोजगार और विश्वास ही स्थायी शांति की नींव हैं तथा मुख्यधारा में लौटे लोगों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं।
समारोह में अतिथियों का स्वागत स्थानीय स्वाद से भरपूर विशेष व्यंजनों से किया गया। बस्तर की पारंपरिक भाजी वाला भजिया और इटैलियन कटलेट ने अतिथियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। वहीं कैफे की जनजातीय भित्ति चित्रों, प्राकृतिक परिवेश और स्थानीय पहचान को दर्शाने वाली सज्जा की भी सराहना हुई।
कार्यक्रम के दौरान कैफे के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पुलिस विभाग के कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने उनके उत्कृष्ट कार्य और समर्पण की प्रशंसा करते हुए उन्हें पुरस्कार राशि प्रदान की।
पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुडिय़ा ने कहा कि मैत्री कैफे का उद्देश्य केवल एक व्यावसायिक केंद्र स्थापित करना नहीं, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार उपलब्ध कराना, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और पुलिस तथा समाज के बीच विश्वास को और मजबूत बनाना है।
नारायणपुर पुलिस की यह पहल सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और सामाजिक विश्वास को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। उम्मीद की जा रही है कि ‘मैत्री कैफेÓ भविष्य में नागरिकों, युवाओं, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और सहभागिता का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा तथा नक्सली पुनर्वास के क्षेत्र में प्रेरणादायी मॉडल के रूप में स्थापित होगा।
००००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

