रांची 21 जून (आरएनएस)। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खडग़पुर ने अनुसंधान, शिक्षा और संस्थागत क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त शोध, पीएचडी सुपरविजन, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज तथा अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के साझा उपयोग जैसे क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे।
एमओयू पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और आईआईटी खडग़पुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं शोधकर्ता उपस्थित रहे। प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यह साझेदारी बीआईटी मेसरा की अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार आधारित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों और शिक्षकों को उच्चस्तरीय शोध एवं तकनीकी विकास के नए अवसर प्राप्त होंगे। वहीं प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि यह समझौता ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध पहलों और क्षमता निर्माण को मजबूती देगा, जिसका लाभव्यापक शैक्षणिक समुदाय को मिलेगा। एमओयू के तहत मास्टर एवं पीएचडी छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर शोध सहयोग, समर और विंटर इंटर्नशिप, छात्र एवं फैकल्टी विनिमय तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों के समक्ष संयुक्त शोध प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशालाएं, जीआईएएन और माइक्रो-क्रेडिट कोर्स जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। दोनों संस्थान भविष्य में संयुक्त इंटीग्रेटेड एम.टेक-पीएचडी तथा ड्यूल डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। समझौते के क्रियान्वयन और प्रगति की निगरानी के लिए एक संयुक्त एमओयू इम्प्लीमेंटेशन कमिटी गठित की जाएगी, जो प्रत्येक छह महीने में समीक्षा करेगी। इस साझेदारी से बीआईटी मेसरा के छात्रों को आईआईटी खडग़पुर के उन्नत शोध बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञ फैकल्टी तक पहुंच मिलेगी। छात्र संयुक्त शोध परियोजनाओं में भाग लेने के साथ-साथ आईआईटी खडग़पुर की प्रयोगशालाओं का भी उपयोग कर सकेंगे।राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप यह सहयोग पूर्वी भारत के दो प्रतिष्ठित संस्थानों को एक मंच पर लाता है। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, जल संसाधन, जलवायु अनुकूलन और रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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