नई दिल्ली,25 जून(आरएनएस)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुरुवार को राष्ट्रव्यापी छात्रों की गूंज नामक अभियान का शुभारंभ किया. यह 40 दिनों का अभियान देश के 28 प्रमुख शहरों में छात्रों, अभ्यर्थियों, कोचिंग हब, कॉलेज कैंपस, पुस्तकालयों और युवा समूहों के बीच चलाया जाएगा.
यह अभियान उन छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों की आवाज है जिनकी मेहनत पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, रिजल्ट में देरी, भर्ती अटकने और एनटीए की नाकामी के कारण बर्बाद हो रही है. छात्र निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे हैं. इस मौके पर दिल्ली में कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस वार्ता की.
कांग्रेस पार्टी ने छात्रों की गूंज आंदोलन के तहत छात्रों से जुडऩे की अपील की है, जिसके तहत एक मिस्ड कॉल नंबर -9873036161 जारी किया गया है साथ ही छात्रों से छात्रोंकीगूंजडॉटआईएन पर जाकर रजिस्टर करने की अपील की गयी है. देश के 28 शहरों में चल रहे इस जनांदोलन से जुड़कर अपने शहर में छात्रों की गूंज चैप्टर का हिस्सा बन सकते है. क्योंकि ये लड़ाई अब राजनीतिक नहीं बल्कि युवा भारत के सपनों को बचाने का छात्र आंदोलन है.
गौरव गोगोई ने कहा कि नीट यूजी 2026 ने परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे का संकट और गहरा कर दिया है. भाजपा सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पारदर्शिता और सुधार के नाम भारत के छात्रों पर थोपा था, लेकिन यह संस्था आज करोड़ों छात्रों के लिए नेशनल ट्रॉमा एजेंसी बन चुकी है. देशभर में पिछले वर्षों में लगभग 89 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले सामने आए, लेकिन आज तक किसी बड़े सरगना, राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्ति या पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं हुआ. गिरफ्तार हुए तो सिर्फ छोटे दलाल और मोहरे, जबकि असली किंगपिन और भाजपाई संरक्षक हमेशा बचते रहे. गोगोई ने आगे कहा कि नीट यूजी 2026 का पेपर लीक इस सड़ चुकी व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है. लाखों छात्रों ने वर्षों की मेहनत, करोड़ों परिवारों ने अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर लगाई, लेकिन परीक्षा फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई. इस घोटाले के बाद देशभर में 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली.
कई छात्रों ने अपने सुसाइड नोट में व्यवस्था से टूटने और भविष्य के अंधकार का उल्लेख किया. फिर भी देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने न तो नैतिक जिम्मेदारी ली और न ही इस्तीफा दिया. गोगोई ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं स्वीकार किया कि छात्रों की आत्महत्या के लिए मै जिम्मेदार हूं, तो फिर इस्तीफा क्यों नहीं? दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे मुद्दे पर एक शब्द बोलना जरूरी नहीं समझा.यह लड़ाई केवल नीट की नहीं है. यह लड़ाई उस पूरी शिक्षा व्यवस्था को बचाने की है जो आज आईसीयू में पहुंच चुकी है. शिक्षा मंत्री और एनटीए इस संकट की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में छात्रों का भरोसा टूटता है, तो जवाबदेही भी राष्ट्रीय स्तर पर तय होनी चाहिए.
गौरव गोगोई ने कहा कि हाल में आई विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 वर्षों में 89 पेपर लीक मामले सामने आए और कम से कम 6.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए. इनमें करीब 48 परीक्षाओं में रीटेस्ट हुआ और 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही रद्द हुई. रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद नीट 2024 को छोड़कर कम से कम 64 बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक के आरोपों से प्रभावित हुईं और ये मामले 19 राज्यों में फैले. इनमें 45 सरकारी भर्ती परीक्षाएं थीं और कम से कम 27 परीक्षाएं रद्द या स्थगित हुई. पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें वेंडर एजेंसियां, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट चैन, परीक्षा केंद्र, अंदरूनी लोग, बिचौलिए और सॉल्वर गैंग तक की भूमिका बार बार सामने आती रही है.कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं है. यह नौकरी का मुद्दा है. यह युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों का मुद्दा है.
कांग्रेस सांसद गोगोई ने कहा कि हाल ही में कोटा में राहुल गांधी जी ने कुछ आंकड़ों के माध्यम से साबित किया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था एक रिजेक्शन सिस्टम है. उन्होंने बताया की जहां एक तरफ देश का कुल शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ है, वहीं सिर्फ 22 लाख नीट छात्रों का कुल खर्च 1.32 लाख करोड़ है. देश की टॉप-5 परीक्षाओं एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई, नीट का खर्च भारत सरकार के कुल शिक्षा बजट से 3 गुना है. भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था एक वसूली तंत्र है जिससे निकलने वाले 1000 युवाओं में से सिर्फ 12 बच्चों को फॉर्मल रोजगार मिलता है. उन्होंने कहा कि इसीलिए नेता प्रतिपक्ष राहल गांधी ने राजस्थान के कोटा से छात्रों की गूंज राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत की है. यह आंदोलन अब देश के 28 शहरों में छात्रों, अभ्यर्थियों और युवाओं की आवाज बनेगा.
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