नई दिल्ली,25 जून(आरएनएस)। देश में साल 1975 में लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) की आज 51वीं बरसी है। इस मौके पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय इतिहास का सबसे काला अध्याय और लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने आपातकाल का डटकर विरोध करने वाले और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाले जांबाज नागरिकों को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। उन्होंने लिखा कि आपातकाल के दौरान देश के नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई थी, अभिव्यक्ति की आजादी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी और राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों तथा समाज सेवकों को जेलों में ठंस दिया गया था। पीएम ने कहा कि यह दिन हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है।
प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों के साहस को सलाम करते हुए कहा कि उस दमनकारी दौर ने अनगिनत भारतीयों के असाधारण साहस को भी दुनिया के सामने रखा, जिन्होंने चुप रहने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने आगे लिखा कि हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का जीता-जागता प्रतीक है। हम सभी सांविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं और अपनी इस सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।
संस्कृत सुभाषितम् के जरिए दिया स्वतंत्रता का संदेश
इस ऐतिहासिक दिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी साझा किया:
स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।
इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य को वास्तविक सुख मिलता है, स्वतंत्रता से ही वह सर्वोच्च उपलब्धि हासिल करता है। आजादी से ही व्यक्ति शांत अवस्था को प्राप्त होता है और इसके माध्यम से ही वह जीवन में परम पद को प्राप्त कर सकता है। पीएम ने कहा कि इसी भावना से प्रेरित होकर हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमेशा समर्पित रहे।
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