नगर क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों की कुंडली खंगालेगी स्पेशल टीम
कोलकाता 26 जून (आरएनएस)। तारातला हादसे के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने बहुमंजिला और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निर्माणाधीन हाईराइज इमारतों की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। आज राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ग्राउंड प्लस पांच मंजिल (जी+5) या उससे ऊंची इमारतों को ही हाईराइज श्रेणी में रखा जाएगा। सामान्य मकानों की मरम्मत या छोटे स्तर के विस्तार कार्य इस विशेष ऑडिट अभियान का हिस्सा नहीं होंगे।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि निर्माण नियमों का उल्लंघन होने पर भवन निर्माण योजनाएं रद्द कर दी जाएंगी, और इस बात पर जोर दिया कि मानव जीवन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शहरीकरण को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मौसम की स्थिति अनुकूल रहने पर, अधिकारी ताराताला स्थल पर चल रहे बचाव अभियान को शुक्रवार रात तक पूरा करने का प्रयास करेंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल पुलिस और अन्य एजेंसियों के सहयोग से बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहा है। शुभेंदु सरकार ने अगले 90 दिनों के भीतर सभी हाईराइज इमारतों के फायर सेफ्टी सिस्टम और लाइटनिंग अरेस्टर की तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना है। 31 जुलाई तक कोलकाता समेत कई नगर क्षेत्रों में निर्माणाधीन बहुमंजिला और कमर्शियल भवनों का विशेष ऑडिट किया जाएगा। इस दौरान भवन निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा मानकों की विस्तार से जांच होगी। पहले यह अभियान कोलकाता, राजारहाट-न्यू टाउन, सोनारपुर और बजबज तक सीमित था। अब इसे विस्तार देते हुए दक्षिण दमदम, बरानगर और कमारहाटी नगर क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे महानगर और उसके आसपास के इलाकों में निगरानी और मजबूत होगी। जांच में अगर किसी भवन में गंभीर अनियमितता या सुरक्षा संबंधी खामी मिलती है तो उसकी अनुमति रद्द की जा सकती है। वहीं, मामूली कमियां मिलने पर उन्हें निर्धारित समय में दूर करने का निर्देश दिया जाएगा। सभी मानकों का पालन करने वाले भवनों को ही अंतिम मंजूरी मिलेगी।
आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार का मकसद राज्य में शहरीकरण को रोकना नहीं है। लेकिन इंसानी जिंदगी बहुत कीमती है। इसलिए यह जांचना ज़रूरी है कि निर्माण कार्य ठीक से और कानून के नियमों के मुताबिक हो रहा है या नहीं।” फिर भी, आम जनता को इन सख़्त उपायों से घबराने या उलझन में पडऩे की कोई ज़रूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि निजी घरों के नवीनीकरण या मरम्मत का काम इस नियम के दायरे में नहीं आता है। एक महीने की इस रोक के दौरान, लोग अपने घरों में निर्माण या मरम्मत का कोई भी काम बेझिझक जारी रख सकते हैं।
तारातला हादसा को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वेयरहाउस निर्माण को लेकर ‘अयान ट्रेडर्सÓ और आर्किटेक्ट की जिम्मेदारी थी कि वे निगरानी करें और देखें कि कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड सेफ्टी नियमों के अनुसार और अच्छी क्वालिटी के कंस्ट्रक्शन मैटेरियल का इस्तेमाल करके किया जा रहा है या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस मामले में कम से कम निगरानी भी नहीं की गई। इसलिए उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह तो बस शुरुआत है। भरोसा रखिए कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने आम लोगों से यह अपील भी की कि जो कोई भी बिल्डिंग प्लान में धोखाधड़ी का शिकार होता है, उसे तुरंत लोकल पुलिस थाना जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम जरूर कार्रवाई करेंगे।”

