नई दिल्ली,27 जून(आरएनएस)। गृह मंत्रालय ने भले ही ड्रग तस्करी के खिलाफ पूरे देश में आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन देश भर के बड़े महानगरीय क्षेत्रों जैसे दिल्ली- एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु, खासकर महंगे सिंथेटिक ड्रग्स और कोकीन के इस्तेमाल के मुख्य केंद्र बन गए हैं, जो शहरों की बढ़ती मांग और खरीदने की क्षमता को दिखाता है.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के 2025 के लिए जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जब्त की गई कुल 226 किलोग्राम कोकीन में से, महाराष्ट्र से 108.06 किलोग्राम जब्त की गई. इसके बाद दिल्ली में 55.49 किलोग्राम, तमिलनाडु में 15.60 किलोग्राम और कर्नाटक में 14.52 किलोग्राम कोकीन जब्त की गई.
ड्रग तस्करी गिरोह तेजी से टेक्नोलॉजी और अलग-अलग लॉजिस्टिक्स चैनल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि पकड़े जाने से बचा जा सके. इसके लिए वे डेड ड्रॉप तरीकों, ड्रोन, डार्कनेट मार्केट, क्रिप्टोकरेंसी, कूरियर सर्विस और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
ड्रोन से होने वाली तस्करी भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक बड़ा और तेजी से बढ़ता खतरा बनकर उभरा है. 2025 में, 305 मामले पकड़ में आए और 468 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए, जो 2024 के मुकाबले 98 प्रतिशत अधिक है.
एनसीबी की 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है, इस खतरे का पैमाना इसके बढऩे के तरीके से पता चलता है: 2021 में सिर्फ 3 घटनाओं (10 किलोग्राम) से, घटनाएं बढ़कर 2022 में 35 (148 किलोग्राम) हो गईं, फिर 2023 में 28 (103 किलोग्राम), और फिर तेजी से बढ़कर 2024 में 179 घटनाएं (236 किलोग्राम) और 2025 में 305 घटनाएं (468 किलोग्राम) हो गईं. पंजाब में 298 घटनाएं पकड़ी गईं और 461 किलोग्राम जब्ती हुई, जिनमें मुख्य रूप से हेरोइन (449.751 किलोग्राम) और मेथामफेटामाइन (9.018 किलोग्राम) शामिल थे. इसके अलावा, राजस्थान (2 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन जब्त) और जम्मू कश्मीर (5 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन और अफीम जब्त) में भी ऐसी घटनाएं हुईं.
गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर) हेरोइन, हशीश और एटीएस की तस्करी का एक मुख्य माध्यम बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के 2022 के ड्रग बैन के बावजूद, जिससे अफगान अफीम का प्रोडक्शन 93 प्रतिशत कम हो गया, पहले से मौजूद स्टॉक (लगभग 13,200 टन) सप्लाई जारी रखे हुए हैं.
भारत के सीमावर्ती राज्यों पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान से सीमा पार होने वाली तस्करी के लिए बहुत ज्यादा असुरक्षित हैं. अकेले पंजाब में 2025 में 2,086 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई, जो देश भर में हुई हेरोइन की कुल जब्ती (3,567 किलोग्राम) का 58 प्रतिशत है.
गोल्डन ट्रायंगल, पूर्वोत्तर राज्यों से होते हुए मेथामफेटामाइन की तस्करी का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है. म्यांमार में अफीम का उत्पादन 2024 में 995 टन तक पहुंच गया.
गोल्डन ट्रायंगल का खतरा सबसे ज्यादा पूर्वोत्तर के जमीनी बॉर्डर पर दिखता है. मणिपुर कॉरिडोर, जिससे नेशनल हाईवे 102 गुजरता है, हेरोइन और मेथामफेटामाइन टैबलेट्स की भारत में तस्करी के लिए मुख्य प्रवेश बिंदु है.
खास बात यह है कि मिजोरम में 1,477 किलोग्राम एम्फेटामाइन टाइप स्टिमुलेंट (एटीएस) जब्त किया गया (देश भर में जब्त किए गए 3,485 किलोग्राम का 42 प्रतिशत). इसके बाद मणिपुर (535 किलोग्राम), दिल्ली (454 किलोग्राम) और कर्नाटक (164 किलोग्राम) से बड़ी जब्ती हुई.
ड्रग कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा को ड्रग तस्करी के लिए उभरते खतरों के तौर पर पहचाना है. एनसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, इंडो-नेपाल कॉरिडोर खुली सीमा का फायदा उठाते हुए उत्तरी और पूर्वी भारत में कैनाबिस, हशीश और फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के प्रवाह को आसान बनाता है.
एनसीबी ने कहा है, भारत-बांग्लादेश बॉर्डर इलाकों का इस्तेमाल कोकीन से बनी चीजों और एक्स्टसी टैबलेट की तस्करी के लिए किया जाता है, जिसमें पूर्वी राज्य मुख्य आवागमन और वितरण केंद्र के तौर पर काम करते हैं. अवैध अफीम की खेती के पैटर्न बदल रहे हैं, अफीम और गांजे का उत्पादन धीरे-धीरे उत्तर-पूर्वी सीमावर्ती इलाकों और कुछ तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जो घरेलू आपूर्ति स्रोतों के विकेंद्रीकरण का संकेत है.
लगभग 2.1 प्रतिशत आबादी (2.26 करोड़ लोग) ओपिओइड का इस्तेमाल करती है. भारत में ओपिओइड का इस्तेमाल दुनिया के औसत से तीन गुना ज्यादा है. खास बात यह है कि इस कैटेगरी में एक बड़ा बदलाव आया है. जहां 2024 में ओपियम सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ओपिओइड था, वहीं अब हेरोइन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ओपिओइड के तौर पर उससे आगे निकल गया है.
लगभग 2.8 प्रतिशत आबादी (3.1 करोड़ लोग) कैनेबिस का इस्तेमाल करती है. इसमें दो करोड़ लोग भांग (वैध) और 1.3 करोड़ लोग गांजा और चरस जैसे अवैध उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि यह वैश्विक औसत से कम है, लेकिन गांजा/चरस पर निर्भर लोगों का अनुपात (7 में से 1) भांग पर निर्भर लोगों (16 में से 1) से ज्यादा है.
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1.08 प्रतिशत (1.18 करोड़ लोग) नॉन-मेडिकल तरीके से सेडेटिव (नींद की दवा) लेते हैं. कोकीन (0.10 प्रतिशत), एम्फैटेमिन टाइप स्टिमुलेंट्स (0.18 प्रतिशत), और हैलुसिनोजेन्स (0.12 प्रतिशत) जैसे दूसरे ड्रग्स अभी आबादी के एक छोटे हिस्से पर असर करते हैं.
एनसीबी की रिपोर्ट में देश भर में ड्रग तस्करी में विदेशी नागरिकों के शामिल होने पर भी रोशनी डाली गई है. 2025 में, जांच एजेंसियों ने ड्रग तस्करी में शामिल होने के आरोप में कुल 747 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था. सबसे ज्यादा आरोपी नेपाल (203), नाइजीरिया (146) और म्यांमार (97) से थे, जिससे पता चलता है कि भारत पड़ोसी देशों और पश्चिम अफ्रीका से चल रहे तस्करी नेटवर्क के लिए कितना कमजोर है. दूसरे आरोपियों में बांग्लादेश (17), केन्या (10) और घाना (9) के शामिल थे.
खास बात यह है कि एनसीबी में अभियोजन पक्ष को और व्यवस्थित और मजबूत बनाने के लिए, अभियोजन निदेशालय बनाने के प्रस्ताव को गृह मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है.
दिसंबर 2025 तक, देश भर की अलग-अलग अदालतों में एनसीबी के 2,667 केस विचाराधीन थे. इस दौरान, एनसीबी के 203 मामलों में ट्रायल पूरा हुआ. इनमें से 131 केस में सजा हुई, जबकि 69 केस में आरोपियों को बरी कर दिया गया. जबति 3 केस में आरोपियों की मौत की वजह से ट्रायल पूरा नहीं हो सका और इन केस को खत्म कर दिया गया.
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