मेरठ 1 जुलाई (आरएनएस)।। मेरठ की धरती पर ऐसे कई चिकित्सक परिवार हैं, जहां स्टेथोस्कोप केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपी जाने वाली विरासत है। किसी घर में दादा ने इलाज की शुरुआत की, पिता ने उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अब बेटे-बेटियां आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के साथ उसी सेवा-संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉक्टर्स डे पर ऐसे परिवार यह साबित करते हैं कि चिकित्सा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज के प्रति आजीवन समर्पण का संस्कार है।
बाल रोग चिकित्सा में उपाध्याय परिवार का नाम विशेष सम्मान से लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभागाध्यक्ष रहे डॉ. अमित उपाध्याय पिछले लगभग ढाई दशकों से बच्चों के उपचार से जुड़े हैं। यह सेवा उन्हें विरासत में मिली।
नेत्र चिकित्सा में मील का पत्थर हैं डॉ. संदीप मित्थल। मेडिकल कॉलेज में कॉर्निया बैंक और आई बैंक की स्थापना से लेकर आधुनिक माइक्रोइन्सिजन फैको, एक्टिव फ्लूडिक्स सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रोबोटिक तकनीक से मोतियाबिंद सर्जरी तक, उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कई नए आयाम स्थापित किए।
1200 से अधिक नेत्रहीनों को दृष्टि दिलाने का उनका कार्य चिकित्सा सेवा की मिसाल माना जाता है। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन्स एंड सर्जन्स, ग्लास्गो द्वारा मानद एफआरसीएस से सम्मानित किया जा चुका है। अब उनकी पुत्री डॉ. कोपल मित्थल इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। लेसिक सर्जरी, मोतियाबिंद और रेटिना रोगों के उपचार में उनकी विशेषज्ञता नई पीढ़ी की आधुनिक चिकित्सा का प्रतिनिधित्व करती है। डा. मित्थल के पिता डा. केजी मित्थल भी नामचीन रहे हैं।
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