शासन प्रशासन के आदेशों का नहीं हुआ अनुपालन
सुल्तानपुर 2 जुलाई (आरएनएस)। पिछले महीने लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग में आग लग जाने के कारण कई बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। जिससे कोचिंग संस्थानों के ऊपर शासन और प्रशासन की नजर पड़ी, मानक विहीन कोचिंग संस्थान बंद कराए जाने लगे, कोचिंग संचालक ताला लगा कर कुछ दिन के लिए बच्चों की छुट्टी कर खुद आराम करने लगे। और मामले को ठंडे बस्ते में जाने का इंतजार करने लगे। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से निरीक्षण करते हुए चेतावनी जारी करते रहे कि बिना मानक पूरे कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं हो सकता।
जिला विद्यालय निरीक्षक और अग्नि शमन विभाग भी कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी कर कोचिंग रेगुलेशन एक्ट का पालन करने का निर्देश जारी करने लगे। किंतु जैसे ही समय बीतता जा रहा है कोचिंग संस्थानों का ताला भी धीरे धीरे खुलने लगा और प्रशासन का आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित हो चुका है। प्रश्न ये है कि क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार करता है विभाग ? और यदि पहले से ही जानकारी है कि जिले में अवैध रूप से कोचिंग संस्थान संचालित है तो उनको बंद कराने का प्रयास क्यों नहीं होता। दूसरा सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि ज्यादातर कोचिंग संस्थान के संचालक निजी स्कूल के अध्यापक ही है जो अपने विद्यालय के बच्चों पर अनुचित प्रभाव स्थापित कर कोचिंग का संचालन ऐसे भवनों में कर रहे है जिसमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की बात करना बेईमानी होगी। कोचिंग रेगुलेशन एक्ट के अनुसार 16 साल से कम के बच्चों को आप कोचिंग नहीं पढ़ा सकते। कोचिंग संस्थान जिस भवन में संचालित है उसका नक्शा, अग्नि शमन विभाग की एन ओ सी, सीसीटीवी कैमरा, आपातकालीन द्वार, हवादार कमरे, उपयुक्त विद्युत कनेक्शन और योग्य अध्यापक द्वारा अध्यापन, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में पंजीकरण। अग्नि शमन विभाग की माने तो जिले पंजीकृत या गैर पंजीकृत संस्थानों में केवल आकाश कोचिंग को ही अग्नि शमन एन ओ सी प्रदान की गई है। बाकी सब बिना एनओसी ही संचालित हो रही है।
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