रायपुर,03 जून (आरएनएस)। राजधानी रायपुर के अंतरराज्यीय बस स्टैंड के निर्माण के लिए करीब दो दशक पहले दूधाधारी मठ ट्रस्ट से ली गई 30 एकड़ जमीन के बदले अब तक दूसरी जमीन नहीं मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007-08 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर रावणभाठा में अंतरराज्यीय बस स्टैंड निर्माण के लिए दूधाधारी मठ ट्रस्ट ने अपनी 30 एकड़ जमीन देने पर सहमति दी थी। समझौते के तहत ट्रस्ट को नवा रायपुर में जमीन देने और बस स्टैंड परिसर में बनने वाले कॉम्प्लेक्स की आधी दुकानें देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद ट्रस्ट ने जमीन नगर निगम को सौंप दी, लेकिन निर्माण कार्य बीच में रुक गया।
बाद में जमीन का लैंड यूज बदलकर अंतरराज्यीय बस स्टैंड का निर्माण पूरा किया गया और इसका नाम भी दूधाधारी मठ के नाम पर रखा गया। हालांकि, ट्रस्ट को बदले में न तो जमीन मिली और न ही वादे के अनुरूप लाभ।
भूपेश बघेल सरकार के दौरान नवा रायपुर में जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई, लेकिन मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहा। सरकार बदलने के बाद भी समाधान नहीं निकला। ट्रस्ट ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी से भी मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। इसके बाद ट्रस्ट ने हाईकोर्ट का रुख किया।
दुकानों के आवंटन पर भी उठाए सवाल
दूधाधारी मठ ट्रस्ट ने बस स्टैंड परिसर की दुकानों के आवंटन में भी अनियमितता का आरोप लगाया है। ट्रस्ट का दावा है कि समझौते के तहत उसे 14 दुकानें मिलनी थीं, लेकिन सात दुकानों को विभाजित कर 14 दुकानें दिखा दी गईं। ट्रस्ट का कहना है कि बिजली मीटर स्वीकृति के दौरान पता चला कि केवल सात दुकानों के लिए ही मीटर स्वीकृत किए गए थे। इन सभी तथ्यों का उल्लेख ट्रस्ट ने अपनी हाईकोर्ट में दायर याचिका में किया है।
अब हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद इस लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।
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