मेलबन/ नई दिल्ली, 09 जुलाई (आरएनएस)। संबोधित करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों में बसी भारतीय डायस्पोरा है। हॉल में भारी भीड़ और फ्लैशलाइट की जगमगाहट के बीच प्रधानमंत्री ने विक्टोरिया के प्रीमियर और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीसी का भी अभिनंदन किया।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत पारंपरिक अभिवादन “वणक्कम मेलबन, नमस्कार माइट्स, केम छो” के साथ की। उन्होंने कहा कि 2014 में 28 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया आया था और तब उन्होंने कहा था कि अब 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पिछले 12 वर्षों में यह उनकी तीसरी यात्रा है और यह “हैट्रिक” दोनों देशों की बढ़ती दोस्ती का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि मेलबन ने अपनी ऊर्जा और स्वागत से “मैदान मार लिया है”। यहां का भारतीय समुदाय संस्कृति के रंगों से शहर को और वाइब्रेंट बना रहा है। लिटिल इंडिया और मिनी इंडिया जैसे बाजार भारतीयता की पहचान बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीयों के घरों में भले दो Time Zone चलते हों, लेकिन दिनचर्या आज भी भारत से जुड़ी है। “दूध ऑस्ट्रेलिया का, लेकिन चाय भारत वाली” का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, अपने प्रेम का रंग घोल देते हैं।प्रधानमंत्री ने भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए “Grow More Achieve More” का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनॉमी है और जल्द ही टॉप थ्री में पहुंचना चाहता है। चंद्रयान की सफलता के बाद अब गगनयान और स्पेस स्टेशन की तैयारी है। 5G के सबसे तेज रोलआउट के बाद अब 6G पर काम चल रहा है। मेट्रो, वंदे भारत, नमो भारत जैसी परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बढ़ रही है।उन्होंने “नागरिक देवो भव” को आज की गवर्नेंस का मूल मंत्र बताया। सेल्फ अटेस्टेशन से शुरू हुई यात्रा अब 70 करोड़ यूज़र वाले DigiLocker और 48 करोड़ टेलीकंसल्टेशन वाले ई-संजीवनी तक पहुंच गई है। पासपोर्ट अब कुछ ही दिनों में मिल जाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का सामर्थ्य बढ़ने से पूरी मानवता को फायदा होता है। वेनेजुएला भूकंप, तुर्किए-सीरिया, म्यांमार और श्रीलंका में भारत के राहत अभियान इसका उदाहरण हैं। कोरोना काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजी गई। “भारत मदद करते समय पासपोर्ट का रंग नहीं देखता।”खेल और नवाचार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया से गांव-गांव में प्रतिभा निखर रही है। भारत 2030 कॉमनवेल्थ और 2036 ओलंपिक्स की मेजबानी का दावेदार है। भारत-ऑस्ट्रेलिया ट्रेड एग्रीमेंट से शुरू हुआ कारवां अब 40 देशों तक पहुंचा है। भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप और 10 हजार स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स चल रही हैं। डीकिन और वुलोन्गोंग यूनिवर्सिटी के कैंपस अब भारत में भी हैं।अंत में उन्होंने प्रवासी बच्चों के लिए “भारत को जानो” क्विज के 6वें एडिशन में हिस्सा लेने का आग्रह किया और कहा कि अब भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का नया फेज शुरू हो रहा है। “आप संबंधों में चौके-छक्के मारते रहिए, आपकी सफलता में ही भारत और ऑस्ट्रेलिया की सफलता है।”
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