New Delhi 10 Jully /- पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक संकट और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर मंडराते खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को चाक-चौबंद करने के लिए एक बेहद रणनीतिक और बड़ा कदम उठाया है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के मद्देनजर देश की शीर्ष सार्वजनिक तेल और गैस अन्वेषण कंपनी ने दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्र में एक विशाल नया रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार स्थापित करने की घोषणा की है. इस महत्वपूर्ण परियोजना के जरिए देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय आपातकाल या युद्ध जैसी स्थितियों में अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने में सक्षम हो सकेगा.
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया सुरक्षा कवच, विदेशी तेल पर निर्भरता की चुनौती
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश के रूप में भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आयात करता है. हाल के दिनों में वैश्विक तनाव के चलते जब प्रमुख समुद्री संकीर्ण मार्गों से होने वाली सप्लाई चेन प्रभावित हुई, तो घरेलू स्तर पर सुरक्षात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बेहद बढ़ गई. इसी के समाधान के तौर पर सरकारी तेल कंपनी ने नियामक फाइलिंग में जानकारी दी है कि वह मंगलुरु में 17.5 लाख टन की क्षमता वाला एक नया ‘राष्ट्रीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व’ विकसित करने जा रही है, जो संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को थमने नहीं देगा

