अंबिकापुर,11 जुलाईं (आरएनएस)। अपराधों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना और दोषसिद्धि दर बढ़ाने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस ने जिले के विवेचकों के लिए एनडीपीएस एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, साइबर क्राइम और फॉरेंसिक विज्ञान विषयों पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में आयोजित इस प्रशिक्षण में जांच अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।कार्यशाला का आयोजन डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल (आईपीएस) के निर्देशन में किया गया। इसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों, एसडीओपी ग्रामीण तुल सिंह पट्टावी, अतिरिक्त लोक अभियोजक नरेंद्र पांडेय, नितेश चंद्र शुक्ला, मनोज तिवारी, एफएसएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सहित जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी और विवेचक शामिल हुए।प्रशिक्षण के दौरान विवेचकों को एनडीपीएस मामलों में डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग, घटनास्थल की वीडियोग्राफी, टेस्टिंग किट के प्रयोग, वाणिज्यिक मात्रा के मामलों में आर्थिक जांच तथा पीआईटी-एनडीपीएस के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई। वहीं एससी-एसटी एक्ट के मामलों में त्वरित जांच, अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं के पालन और निष्पक्ष विवेचना पर विशेष जोर दिया गया। लोक अभियोजकों ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर भी मार्गदर्शन दिया।साइबर अपराध े जुड़े मामलों में बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने, संदिग्ध खातों और आईपी एड्रेस की जानकारी जुटाने, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से तकनीकी विवरण प्राप्त करने तथा डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के तरीके बताए गए। इसके अलावा फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र और पैक करने, फिंगरप्रिंट विकसित करने तथा साक्ष्यों को दूषित होने से बचाने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित विवेचना से जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा और न्यायालय में दोषसिद्धि की दर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

