कोंडागांव, 11 जुलाईं (आरएनएस)। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली/राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा निर्देशानुसार स्वामी आत्मानंद इंगलिश मिडियम स्कुल कोण्डागांव में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन।
यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव खिलावन राम रिगरी* के द्वारा आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को विश्व जनसंख्या दिवस के महत्व एवं जनसंख्या से जुड़े सामाजिक, स्वास्थ्य एवं कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में अपर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चंद्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेशमा बैरागी पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गायत्री साय एवं प्रतिधारक अधिवक्ता सुरेन्द्र भट्ट एवं विद्यालय के प्राचार्य/शिक्षकगण व अधिकार मित्र उपस्थित रहे।
उक्त कार्यक्रम में न्यायाधीशगण ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मानाने का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के प्रभाव, परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, शिक्षा तथा सतत विकास के प्रति जसाज को जागरूक करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील किये कि वे स्वयं जागरूक बनें तथ अपने परिवार एवं समाज में भी जनसंख्या संतुलन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के महत्व को संदेश पहुंचाए। साथ ही विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों, शिक्षा के अधिकार, मोटरयान अधिनियम, बाल विवाह, बाल संरक्षण, महिला एवं बाल अधिकार तथा नि:शुल्क विधिक सहायता की उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी दी गई तथा दैनिक जीवन में कानून के पालन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
इस दौरान विशेष कर पॉक्से अधिनियम के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई उन्होंने बताया गया कि यह अधिनियम बच्चों को लैंगिक अपराधो से संरक्षण प्रदान करने हेतु बनाया गया है। विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच की पहचान, किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में बिना भय के अपने माता-पिता, शिक्षक, विश्वसनीय अभिभावक अथवा पुलिस को तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है तथा ऐसे मामलों में कानून अत्यंत कठोर है। विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, सुरक्षित वातावरण के महत्व तथा साइबर माध्यमों से होने वाले लैंगिक अपराधों से सतर्क रहने के संबंध में भी जागरूक किया गया।
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