कोंडागांव, 11 जुलाईं (आरएनएस)। जिला प्रशासन कोंडागांव द्वारा यूनिसेफ इंडिया एवं सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ लॉ एंड पॉलिसी आईएलएस के सहयोग से महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भारत में बाल संरक्षण प्रणालियों में मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के एकीकरण विषय पर क्षमता-विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े सेवा प्रदाताओं की क्षमता का विकास करना है, ताकि वे बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक आवश्यकताओं की प्रभावी पहचान कर उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान कर सकें।
यह प्रशिक्षण चार चरणों की श्रृंखला के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें अब तक तीन चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। प्रत्येक चरण का आयोजन मासिक आधार पर किया जाता है। प्रशिक्षण के बीच प्रतिभागियों के लिए साप्ताहिक मेंटरिंग एवं सुपरविजन सत्र ऑनलाइन एवं प्रत्यक्ष माध्यम से आयोजित किए जाते हैं, जिससे उन्हें कार्यस्थल पर अर्जित कौशलों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सतत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।
प्रशिक्षण में बाल कल्याण समिति के सदस्य, चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर एवं सुपरवाइजऱ, चाइल्ड केयर संस्थानों के कर्मचारी तथा जिला बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अन्य कार्मिकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का संचालन ष्टरू॥रुक्क की विशेषज्ञ स्पंदना एवं सुश्री चेतना द्वारा किया गया, जबकि यूनिसेफ की जिला परामर्शदाता अमला प्रभा ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बाल मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। अनुभवात्मक गतिविधियों, रोल-प्ले तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने, उनकी समस्याओं की पहचान करने तथा आवश्यक मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने संबंधी व्यावहारिक कौशल विकसित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने प्रशिक्षण के प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा बाल संरक्षण सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण बताया।
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