0- पथराव में एसपी सहित कई घायल
0- कार्यकर्त्ता बोले पर्ची से मुख्यमंत्री बनवा सकते हो विधायक नही
0- जाम,बाजार बंद,इस्तीफे,आंसू गैस,गिरफ्तारी
0- जनचर्चा यही की चुनाव से पहले ही भाजपा ने मानी हार
दतिया,11 जुलाई(आरएनएस)। कभी भारतीय जनता पार्टी के सकन्टमोचक व कांग्रेस की सत्ता को गिरने में अहम भूमिका निभाने वाले, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, का शुक्रवार को भाजपा ने दतिया में होने वाले उपचुनाव में टिकिट काट कर आरएसएस कि पृष्ठभूमि वाले पूर्व निगम अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को दे दिया हैं। उनके नाम कि घोषणा होते ही दतिया भाजपा में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया। कार्यकर्त्ता सड़को पर उत्तर आये, नेशनल हाइवे 44 पर लम्बा जाम लग गया, बाजार बंद हो गया, जिला कार्यकारिणी सहित सभी मंडलो के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्य, नगरपालिका, नगरपरिषदो व कार्यकर्ताओ ने इस्तीफे दे दिए। सुबह नेशनल हाइवे पर लगा 20 किलोमीटर लम्बे जाम को खुलवाने के लिए प्रशासन पहुंचा तो कार्यकताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। जिसके बाद प्रशासन ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कार्यकर्ताओ ने पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में एसपी सहित कई जवान घायल हो गए। कई गाडिय़ों के कांच भी टूट गए। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओ को हिरासत में ले लिया हैं। धारा 163 लागू कर दी गई हैं।
शुक्रवार शाम जैसे ही कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती के द्वारा दायर याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने ख़ारिज कि उसके कुछ ही समय बाद भाजपा ने जिले के भांडेर निवासी आशुतोष तिवारी को दतिया विधानसभा क्षेत्र में होने जा रहे उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। नाम की घोषणा होने के बाद सोशल मीडिया के जरिए लोगो को पता चला कि भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को नही आशुतोष तिवारी को टिकिट दिया तो हर कोई हैरान हो गया। हर कोई यही पूछता नजऱ आया कि ये हैं कौन? बाद में पता चला कि ये जिले की भांडेर विधानसभा क्षेत्र से हैं और आरएसएस की पृष्ठभूमि से आते है। इसी कारण इन्हे टिकिट मिला हैं। टिकिट मिलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए जीत का दावा किया। लेकिन इसके उलट शहर में चर्चा है कि भाजपा ने चुनाव से पहले ही हार मान ली हैं। पार्टी के उग्र कार्यकर्ताओ का कहना हैं कि ऊपर बैठे लोगो को अब ये एहसास करना जरुरी हैं कि पर्चीओ से मुख्यमंत्री तो बना सकते हो लेकिन बिना जनाधार वाले व्यक्ति को विधायक नही बना सकते हो।
दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई थी। आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी किए जाने के बाद प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान बहुत वायरल हुआ था जिसमे उन्होंने कहा था कि भाजपा दतिया उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी और जीत भी दर्ज करेगी। हालांकि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के चुनाव लडऩे की संभावना पर उन्होंने स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए कहा था कि अभी इस विषय में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और चुनाव समिति करेगी। उसी समय से चर्चा होने लगी थी कि चंबल-मालवा की नरोत्तम विरोधी लॉबी सक्रिय हो गई हैं। ये लॉबी नही चाहती है कि नरोत्तम मिश्रा विधानसभा में आए, क्योंकि नरोत्तम के आने से उनके मंसूबो पर पानी फिर जायेगा। नरोत्तम मिश्रा अगर ये उपचुनाव जीत जाते तो प्रदेश कि राजनीति में एक और गुट तैयार हो जाता ये सब प्रदेश नेतत्व को मंजूर नही था।
बताया जा रहा हैं कि पार्टी कि ओर से जो फीडबैक लिया गया था उसमे नरोत्तम मिश्रा बहुत पीछे थे। लेकिन पार्टी से जुड़े लोगो का कहना हैं कि ये फीडबैक किससे लिया गया, दतिया भाजपा से तो ऐसा कुछ पूछा ही नही गया। कुल मिलाकर नरोत्तम मिश्रा को “दतिया का आडवाणी” बनने की तैयारी प्रदेश नेतृत्व ने कर ली हैं। नरोत्तम समर्थक कार्यकताओं का मानना हैं कि वे दादा के अलावा किसी के लिए काम नही करेंगे और चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से सबसे ज्यादा खुश कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी है । दामोदर सिंह यादव तो बहुत दिनों से ताल ठोक कर दावा कर रहे थे कि वो इस चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को 27000 वोटो से हराएँगे। वही कांग्रेस का टिकट शनिवार को घोषित हो सकता हैं। कुंवर घनश्याम सिंह या अवधेश नायक में से पार्टी का कौन उम्मीदवार होगा ये देखना होगा।
उपचुनाव कि घोषणा होते ही यह माना जा रहा था कि यह चुनाव ऐतिहासिक होगा और अब वही हो रहा हैं। अभी तक जो काम कॉंग्रेस में होते थे वह भाजपा में भी हो रहे हैं। शुक्रवार का दिन दतिया की राजनीती के लिए बहुत ऐतिहासिक रहा। राजनीती के दो धुरंधर नेताओं का सूर्य अस्त हो गया। राजेन्द्र भारती और नरोत्तम मिश्रा।
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