नई दिल्ली 12 Jully (Rns): केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कड़ा एक्शन लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री ने उन अधिकारियों की गहन जांच के आदेश दिए हैं जो दिल्ली हाई कोर्ट में एक कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के फैसले का सही तरीके से बचाव करने में नाकाम रहे। अदालती प्रक्रिया के दौरान बरती गई इस लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
बाफना ग्लोबल वेंचर से जुड़ा है विवाद
यह पूरा विवाद बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। NCERT ने 22 जून को एक आदेश जारी कर इस कंपनी को अगले दो साल के लिए अपनी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया था। इस ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को चुनौती देते हुए कंपनी ने 24 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हैरानी की बात यह रही कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए NCERT का कोई भी प्रतिनिधि वहां मौजूद ही नहीं था। इसका सीधा फायदा कंपनी को मिला और हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक कंपनी के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत दे दी। इतना ही नहीं, अदालत ने NCERT को कंपनी की 6 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक गारंटी का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया है।
टेंडर प्रक्रिया और कानूनी पैरवी पर उठे बड़े सवाल
हाई कोर्ट में मामले की सही पैरवी न होने की खबरों पर शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने NCERT से इस पूरे प्रकरण की जांच करने को कहा है, जिसमें मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल की जाएगी कि बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड को तय मानक और योग्यता पूरी नहीं करने के बावजूद टेंडर आखिर कैसे मिल गया। इसके अलावा, मंत्रालय ने इस बात का भी स्पष्ट जवाब मांगा है कि कंपनी तय समय सीमा के भीतर कागज की सप्लाई क्यों नहीं कर पाई और सबसे अहम बात कि NCERT ने हाई कोर्ट में इस पूरे मामले को मजबूती से क्यों नहीं रखा। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पाठ्यपुस्तकों की खरीद और उत्पादन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और ऐसी कोई भी प्रशासनिक या कानूनी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ईरान संघर्ष को बताया देरी का कारण, 20 जुलाई को अगली सुनवाई
अदालत में सुनवाई के दौरान बाफना ग्लोबल वेंचर ने अपनी सफाई में अंतरराष्ट्रीय स्थिति का हवाला दिया। कंपनी का तर्क था कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण कागज बनाने में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण रसायन ‘हाइड्रोजन पेरोक्साइड’ की बाजार में भारी कमी हो गई थी, जिसकी वजह से किताबों के लिए कागज की सप्लाई में देरी हुई। फिलहाल, इस पूरे विवाद की अगली सुनवाई 20 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट में होनी तय है।

