नई दिल्ली 13 जुलाई (आरएनएस)। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने सोमवार को देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश का पूर्वानुमान जताया है। उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। कई क्षेत्रों में आंधी और बिजली चमकने के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है, जबकि राजस्थान में आने वाले दिनों में मानसून कमजोर रहने और ज्यादातर मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बिजली और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान आने की उम्मीद है। गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं के साथ आंधी आ सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में आने वाले दिनों में छिटपुट बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, सोमवार के लिए भारी बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
हिमालयी राज्यों में मानसून सक्रिय रहने की उम्मीद है, जिसमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूरे सप्ताह छिटपुट बारिश होने की उम्मीद है।
राजस्थान में आने वाले सप्ताह में मानसून कमजोर रहने की संभावना है, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्से काफी हद तक शुष्क रहेंगे। ढ्ढरूष्ठ ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में छिटपुट हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अगले कई दिनों तक बारिश की गतिविधि सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूल भरी तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
बिहार में भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी व्यापक बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज बौछारें पडऩे की उम्मीद है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है, जबकि इस सप्ताह के अंत में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश का अनुमान जताया है। क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की उम्मीद है और यह गतिविधि अगले कई दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में बिजली और तेज हवाओं के साथ आंधी आ सकती है। कोंकण और गोवा में व्यापक बारिश जारी रहने की उम्मीद है, जबकि मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट बारिश होने की संभावना है।
तटीय कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और लक्षद्वीप में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी तट तथा मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है।
भारत में एक सप्ताह की अच्छी बारिश के बाद मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है, जिससे जून के अंत में देशव्यापी बारिश की कमी जो 40त्न से घटकर 9 जुलाई तक 14 प्रतिशत रह गई थी, वह इस सूखे दौर के कारण रविवार तक बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अगले छह-सात दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य भारत के मैदानी इलाकों के साथ-साथ दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी कमजोर बारिश का अनुमान जताया है, जिससे अगले सप्ताह यह घाटा और बढ़ सकता है।
इस सूखे स्पेल से पिछले सप्ताह बुआई गतिविधियों में हुए सुधार को झटका लग सकता है, क्योंकि देश के मुख्य मानसूनी कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के सीमित साधनों के कारण खेती मौसमी बारिश पर निर्भर है, जहां वर्तमान में बारिश की भारी कमी देखी जा रही है। यही वजह है कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस बार सभी मुख्य फसलों का बुआई क्षेत्र कम दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस सप्ताह कुछ बारिश का अनुमान जरूर है, लेकिन यह मानसून के इस बड़े घाटे को पाटने के लिए नाकाफी होगी।
स्थिति यह है कि रविवार तक बिहार, झारखंड, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित 15 राज्यों में संचयी (1 जून से 12 जुलाई) मानसूनी बारिश में 20त्न से लेकर 73त्न तक की भारी कमी दर्ज की गई है, जबकि क्षेत्रवार देखा जाए तो बिहार, झारखंड और पांच पूर्वोत्तर राज्यों में कमजोर मानसूनी गतिविधियों के चलते पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज़्यादा 37त्न का बड़ा घाटा देखा गया है।
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