0 ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी 10वीं की मार्कशीट के जरिए लाखों की ठगी का खुलासा, मुख्य आरोपी विनोद राठौर न्यायिक रिमांड पर
रायगढ़, 14 जुलाई (आरएनएस)। रायगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी 10वीं की अंकसूची उपलब्ध कराकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। फरार चल रहे मास्टरमाइंड विनोद कुमार राठौर को कोरबा से गिरफ्तार कर रायगढ़ लाया गया, जहां पूछताछ के बाद उसे धोखाधड़ी और कूटरचना के मामले में न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस प्रकरण में इससे पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली पुलिस ने यह कार्रवाई की।
फर्जी मार्कशीट से मिली थी नौकरी
पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवक (त्रष्ठस्) भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस दौरान सक्ती निवासी नरेंद्र कुमार और जांजगीर-चांपा निवासी सोनम साहू ने आवेदन के साथ 10वीं की अंकसूचियां जमा की थीं। प्रस्तुत अंकों के आधार पर दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के अंतर्गत बर्रा और सुलेसा शाखा में डाकपाल (ग्रामीण डाक सेवक) पद पर हो गया था।
हालांकि नियुक्ति से पहले दस्तावेजों का सत्यापन तमिलनाडु बोर्ड से कराया गया, जिसमें पता चला कि दोनों अंकसूचियां पूरी तरह फर्जी हैं और बोर्ड ने ऐसी कोई मार्कशीट कभी जारी ही नहीं की थी। इसके बाद अधीक्षक डाकघर की शिकायत पर थाना सिटी कोतवाली में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया।
3.5 लाख रुपये लेकर दिलाई थी फर्जी मार्कशीट
जांच के दौरान गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी। आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने के बदले 3 से 3.5 लाख रुपये की मांग की थी। नरेंद्र कुमार ने आरोपी को 3.50 लाख रुपये दिए, जबकि सोनम साहू ने नौकरी मिलने के बाद भुगतान करने की बात कही थी।
आरोपी ने दोनों को फर्जी 10वीं की अंकसूचियां उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में किया। दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद दोनों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
पहले नकली नोट मामले में काट चुका है 10 साल की सजा
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर वर्ष 2013 के नकली नोट मामले में 10 वर्ष की सजा काट चुका है। जेल से रिहा होने के बाद उसने फिर से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों से ठगी का नेटवर्क शुरू कर दिया।
रायगढ़ में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था। ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने कोरबा में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करना स्वीकार किया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास करने वालों और ऐसे गिरोह संचालित करने वाले अपराधियों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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