# स्वास्थ्य क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश के बीच PHFI-IPHS का कहना है कि अब भारत की सबसे बड़ी जरूरत ऐसे प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ तैयार करना है, जो नीतियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदल सकें
नई दिल्ली ,16 जुलाई (आरएनएस)। भारत आज स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक निवेश कर रहा है। आयुष्मान भारत, डिजिटल हेल्थ मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्वास्थ्य सेवाएं, बीमारियों की निगरानी, महामारी से निपटने की तैयारी, जलवायु से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दे और बचाव पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई पहलें देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है—प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी। PHFI इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ साइंसेज़ (PHFI-IPHS) के अनुसार, भारत को अपनी बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए 45,000 से अधिक अतिरिक्त जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य ढांचे पर निवेश तेजी से बढ़ा है, लेकिन जनस्वास्थ्य प्रणाली की योजना बनाने, उसका संचालन करने और उसे मजबूत बनाने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या उसी गति से नहीं बढ़ी है। इसी जरूरत को देखते हुए, पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (IIPH) के नाम से जाना जाने वाला PHFI-IPHS, बहुविषयक शिक्षा, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार कर रहा है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय के तहत यूजीसी विनियमों की ‘डिस्टिंक्ट कैटेगरी’ में डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त करने वाला PHFI-IPHS, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) की पिछले दो दशकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा, शोध और नीति निर्माण के क्षेत्र में रही मजबूत विरासत को आगे बढ़ा रहा है। PHFI-IPHS के एक प्रतिनिधि ने कहा, “भारत की स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं केवल अस्पतालों और बुनियादी ढांचे का विस्तार करने से पूरी नहीं होंगी। इसके लिए ऐसे प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरत है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करें, शोध और तथ्यों के आधार पर बेहतर नीतियां बनाने में मदद करें और लोगों तक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाएं। PHFI-IPHS ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारत और दुनिया के सामने आने वाली नई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सकें।” आज स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों और इलाज तक सीमित नहीं रह गई हैं। कोविड-19 महामारी ने यह साबित कर दिया कि ऐसे विशेषज्ञ कितने जरूरी हैं, जो बीमारी फैलने पर नजर रख सकें, स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन और विश्लेषण कर सकें, बेहतर स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार कर सकें, नीतियां बनाने में सहयोग दे सकें और किसी भी स्वास्थ्य संकट से पहले स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना सकें।PHFI-IPHS का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी देश बनना है, तो केवल अस्पतालों का विस्तार, बेहतर बुनियादी ढांचा और नई तकनीकों को अपनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ-साथ एक मजबूत और प्रशिक्षित जनस्वास्थ्य कार्यबल तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। संस्थान का विश्वास है कि आज तैयार किए गए कुशल जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ आने वाले वर्षों में देशभर के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश को बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

