रांची 16 जुलाई (आरएनएस)। सरला बिरला पब्लिक स्कूल, राँची में भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के अवसर पर विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित सभी जनों को भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के क्वायर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत मधुर एवं भक्तिमय प्रार्थना से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत कर दिया। इसके उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ के रथ का पारंपरिक एवं विधिवत खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया गया। यह प्रतीकात्मक आयोजन एकता, आस्था, समरसता तथा सत्य एवं धर्म की विजय के शाश्वत संदेश का सजीव प्रतीक बना। समारोह का एक अन्य प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोहारी भक्तिमय नृत्य रहा। उनकी भावपूर्ण एवं आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा कार्यक्रम में भक्ति और उल्लास का अद्भुत समावेश किया। कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं भावपूर्ण बनाते हुए प्री-प्राइमरी के नन्हे विद्यार्थियों ने भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा का मनोहारी स्वरूप धारण कर आकर्षक झाँकी प्रस्तुत की। अपनी मासूम अभिव्यक्ति, सहज अभिनय एवं उत्साहपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने भगवान की दिव्य रथयात्रा का अत्यंत सुंदर एवं हृदयस्पर्शी चित्र प्रस्तुत किया, जिसकी सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा रथयात्रा के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर एक ज्ञानवर्धक भाषण भी प्रस्तुत किया गया। वक्ता ने भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महापर्व प्रेम, समानता, सेवा, समर्पण एवं मानवता का संदेश देता है तथा समाज में एकता और सद्भाव को सुदृढ़ करने की प्रेरणा प्रदान करता है। विद्यालय की प्राचार्या मनीषा शर्मा ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में विद्यार्थियों को रथयात्रा के पावन संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा हमें विनम्रता, करुणा, प्रेम, सह-अस्तित्व एवं समरसता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्मरण कराया कि भगवान श्री जगन्नाथ की यह दिव्य यात्रा प्रत्येक व्यक्ति को प्रेम, समानता एवं अपनत्व के भाव से स्वीकार करने का संदेश देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति एवं समृद्ध परंपराओं से सदैव जुड़े रहने तथा जिम्मेदार, दयालु, अनुशासित एवं आदर्श नागरिक बनने का संकल्प लेने का आह्वान किया। संपूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति, सांस्कृतिक गरिमा एवं आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता निभाई और भारतीय संस्कृति तथा जीवन-मूल्यों के प्रति अपनी आस्था एवं सम्मान का प्रेरणादायी परिचय दिया।
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