नई दिल्ली 17 Jully (Rns): सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का कारण अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की वह प्रक्रिया है, जिसमें भारत की अनुपस्थिति के बावजूद पाकिस्तान को न केवल अपना, बल्कि भारत के हिस्से का खर्च भी वहन करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक पाकिस्तान इस प्रक्रिया पर 6 लाख डॉलर (करीब 5.77 करोड़ रुपये) से अधिक खर्च कर चुका है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे के नियम तय किए गए। विवाद की शुरुआत 2016 में हुई, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा जलविद्युत परियोजना पर काम तेज किया और चिनाब नदी पर रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की घोषणा की। पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि वे संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।
भारत का रुख था कि ऐसे तकनीकी विवाद का समाधान संधि के तहत नियुक्त न्यूट्रल एक्सपर्ट के जरिए होना चाहिए, जबकि पाकिस्तान ने मामला सीधे पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) में पहुंचा दिया। इसके बाद दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से चलने लगीं, जिसका भारत ने लगातार विरोध किया।
भारत ने क्यों बनाया दूरी?
भारत का कहना है कि एक ही विवाद पर दो समानांतर प्रक्रियाएं नहीं चल सकतीं और PCA को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी वजह से भारत ने 2023 से PCA की कार्यवाही में हिस्सा लेना बंद कर दिया।
इसके बाद 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया और न्यूट्रल एक्सपर्ट की प्रक्रिया से भी दूरी बना ली। भारत का स्पष्ट रुख है कि वह फिलहाल इस विवाद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं में शामिल नहीं होगा।
पाकिस्तान क्यों उठा रहा भारत का खर्च?
भारत के बहिष्कार के बावजूद पाकिस्तान ने PCA में सुनवाई जारी रखी। जून 2025 में अदालत ने खुद को इस मामले की सुनवाई के लिए सक्षम बताया और कहा कि सिंधु जल संधि को एकतरफा स्थगित नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी भारत ने किसी भी सुनवाई में भाग नहीं लिया।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की कार्यवाही का खर्च सामान्यतः दोनों पक्षों द्वारा साझा किया जाता है। लेकिन भारत की गैरमौजूदगी और फीस जमा नहीं करने के कारण पाकिस्तान को पूरी प्रक्रिया का खर्च उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक पाकिस्तान 6 लाख डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है, जिसमें भारत के हिस्से का भुगतान भी शामिल है।
भारत का कहना है कि वह PCA की वैधता को स्वीकार नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इस मंच के जरिए अपने दावों को आगे बढ़ाने में जुटा है। ऐसे में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच कानूनी और कूटनीतिक टकराव अभी जारी रहने के संकेत हैं।

